प्रयागराज: 10 अक्टूबर (ए) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बहुत ही लापरवाही से आदेश पारित करने और बीएनएसएस की धारा 173(4) के तहत कानूनी आवश्यकताओं का उल्लंघन कर आदेश पारित करने के लिए विशेष न्यायाधीश, एससी/एसटी अधिनियम, महराजगंज के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है।
न्यायमूर्ति संतोष राय ने कहा, जिस तरह से विशेष न्यायाधीश, महराजगंज ने बीएनएसएस की धारा 173 (4) के तहत दाखिल आवेदन पर कार्यवाही की है, वह गंभीर चिंता का विषय है।
अदालत ने नौ अक्टूबर को अपने आदेश में कहा, “उक्त आदेश, विशेष न्यायाधीश द्वारा आपराधिक कानून और प्रक्रिया के बुनियादी सिद्धांतों की मूलभूत समझ की कमी को दर्शाता है।”
इस मामले के तथ्यों के मुताबिक, थाना घुघुली, महराजगंज निवासी शीला (29) और अंजू (26) द्वारा बीएनएसएस की धारा 173 (4) के तहत विशेष न्यायाधीश की अदालत में आवेदन किया गया था।
इस आवेदन में उन्होंने कहा था कि वे अनुसूचित जाति से हैं और उनके परिवार और रामआसरे के परिवार के बीच जमीन और पैसे को लेकर विवाद है। छह जून, 2026 की रात झगड़ा हुआ जिसमें राजेश और पिंटू घायल हुए। बाद में उसी रात पुलिस पिंटू, मोलई, सुरेश और राहुल को उठा ले गई।
उन्होंने कहा कि रात एक से दो बजे के बीच उप निरीक्षक राकेश कुमार यादव, कांस्टेबल अमित कुमार और करीब 20 पुलिसकर्मी जिसमें एक भी महिला पुलिसकर्मी नहीं थी, जबरदस्ती दूसरे पक्ष के घर में घुसे और जाति सूचक टिप्पणियां की।
इस आवेदन पर विशेष न्यायाधीश ने कार्यवाही करते हुए इन पुलिसकर्मियों की टिप्पणी का परीक्षण किए बगैर उनके खिलाफ आदेश पारित किया।
याचिकाकर्ता पुलिसकर्मियों ने कहा कि 11 अगस्त, 2026 को यह आदेश पुलिस जांच रिपोर्ट पर बिना उचित विचार किए और बीएनएसएस के संबंधित प्रावधानों पर बगैर गौर किए पारित किया गया।
