वेतन अनियमितता: 10.3 लाख शिक्षकों और पुलिसकर्मियों का भुगतान रोका गया

पटना बिहार
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पटना: 16 अक्टूबर (ए) बिहार सरकार ने वेतन भुगतान में कथित अनियमितताओं का पता चलने के बाद करीब 10.3 लाख शिक्षकों और पुलिसकर्मियों के वेतन भुगतान पर विस्तृत जांच पूरी होने तक रोक लगाने का निर्देश दिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

वित्त विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है और शिक्षा तथा गृह विभाग को पत्र जारी कर अक्टूबर से वेतन भुगतान रोकने के फैसले की जानकारी दी है। वित्त विभाग के सचिव विनय कुमार ने दोनों विभागों के अधिकारियों को भेजे पत्रों में बताया कि वेतन संबंधी आंकड़ों की जांच के दौरान प्रथम दृष्टया कई अनियमितताएं सामने आई हैं।

उन्होंने अगले महीने का वेतन जारी करने से पहले अनिवार्य जांच कराने, वेतन तैयार करने और मंजूरी देने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने तथा दोषियों के खिलाफ आपराधिक एवं विभागीय कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

विभाग ने धोखाधड़ी या गलती से अतिरिक्त भुगतान की गई राशि संबंधित लोगों से वसूलने को भी कहा है।

विभाग ने वेतन संबंधी विवरण तैयार करने, उसकी जांच और मंजूरी का काम केवल नियमित सरकारी कर्मचारियों से कराने का निर्देश दिया।

उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की टिप्पणियों के आधार पर जांच के आदेश दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि शिक्षा और गृह विभाग में वेतन संबंधी अनियमितताएं सामने आई हैं तथा जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

वित्त विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “जांच में ऐसे लोगों को वेतन दिए जाने के मामले सामने आए हैं, जो सरकारी कर्मचारी नहीं थे। इसके अलावा कुछ कर्मचारियों को उनकी पात्रता से अधिक वेतन दिया गया।”

अधिकारी ने बताया कि कुछ मामलों में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वेतन कोड नए कर्मचारियों को आवंटित किए जाने से उनके खातों में अधिक राशि जमा हुई।

वहीं, कुछ कर्मचारियों के मकान किराया भत्ते में भी कई गुना वृद्धि किए जाने की जानकारी मिली है।

सूत्रों के अनुसार, मानव संसाधन प्रबंधन सेवा (एचआरएमएस) पोर्टल के दुरुपयोग की आशंका है।

मामले के साइबर फॉरेंसिक पहलुओं की जांच के लिए विशेषज्ञों की मदद लेने पर भी विचार किया जा रहा है।