चीन ने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की मांग का समर्थन किया

अंतरराष्ट्रीय
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बीजिंग: 22 अक्टूबर (ए) चीन ने ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पर लगी पाबंदियों के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पर बढ़ रहे दबाव के बीच बृहस्पतिवार को बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की मांग का समर्थन किया।

सऊदी अरब के साथ संघर्ष के बीच हूती विद्रोहियों के हमलों के कारण यह महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग बाधित है।चीन और जिबूती की ओर से संयुक्त रूप से जारी एक बयान के अनुसार, चीन अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को सुरक्षित और खुला रखने के लिए किए जा रहे “रचनात्मक प्रयासों” का समर्थन करता है।

जिबूती में चीन का पहला विदेशी नौसैनिक अड्डा है।

जिबूती की रणनीतिक स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है। यह यमन के सामने, संकरे बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के दूसरी ओर स्थित है।

यह जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और हिंद महासागर तथा भूमध्य सागर के बीच व्यापार के लिहाज से एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।

चीन के विदेश मंत्री वांग यी और जिबूती के उनके समकक्ष अब्दुलकादेर हुसैन उमर के बीच वार्ता के बाद संयुक्त बयान जारी किया गया।

उमर फिलहाल बीजिंग के दौरे पर हैं।

ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण लाल सागर से जहाजों की आवाजाही और बाधित होने की आशंका के बीच यह बयान आया है।

ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ अपने हमले तेज कर दिए हैं।

बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से सऊदी अरब से जुड़े जहाजों को निशाना बनाने की हूतियों की धमकियों ने सऊदी तेल निर्यात को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

चीन के विश्लेषक इस संभावना के भी संकेत दे रहे हैं कि अगर स्थिति और बिगड़ती है, तो चीन जहाजों को सुरक्षा मुहैया कराने के लिए अपने नौसैनिक पोत भेज सकता है।

शंघाई इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल स्टडीज के शोधकर्ता ली वेइजियान ने कहा, “चीन लंबे समय से नौवहन की स्वतंत्रता का समर्थन करता रहा है। बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास स्थित और बीजिंग के एकमात्र विदेशी सैन्य सहायता अड्डे की मेजबानी करने वाले देश जिबूती के साथ ऐसा संयुक्त बयान जारी करना सामान्य परिस्थितियों में जारी होने वाले नियमित कूटनीतिक बयानों की तुलना में कहीं अधिक प्रतीकात्मक महत्व रखता है।”

ली ने हांगकांग स्थित ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ से कहा कि मौजूदा स्थिति में अभी चीनी नौसेना द्वारा जहाजों को सुरक्षा मुहैया कराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि किसी भी चीनी जहाज को अब तक धमकी नहीं दी गई है और न ही उस पर हमला हुआ है।