न्यूयॉर्क/वाशिंगटन: छह मार्च ( ए)
) ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष के बीच अमेरिका ने कहा कि वह भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने के लिए अस्थायी रूप से 30 दिनों की छूट दे रहा है।
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने एक्स पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि यह छूट वैश्विक बाजारों पर दबाव कम करने के उद्देश्य से दी गई है। उन्होंने कहा, “ईरान वैश्विक ऊर्जा को बंधक बनाने की कोशिश कर रहा है।” बेसेंट ने स्पष्ट किया कि यह उपाय रूस को बड़ा वित्तीय लाभ नहीं पहुंचाएगा, क्योंकि यह केवल समुद्र में पहले से फंसे हुए तेल के लेन-देन की अनुमति देता है।
बेसेंट ने भारत को अमेरिका का महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए कहा, “भारत अमेरिका का आवश्यक भागीदार है, और हमें पूरी उम्मीद है कि नई दिल्ली अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाएगी।”बेसेंट के मुताबिक यह कदम जानबूझकर बहुत सीमित अवधि के लिए उठाया गया है ताकि रूस को इससे कोई बड़ा आर्थिक लाभ न मिल सके, क्योंकि यह केवल उन तेल खेपों के लेनदेन की अनुमति देता है जो पहले से समुद्र में फंसी हुई हैं।”इस घोषणा के बाद अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (ओएफएसी) ने एक विशेष लाइसेंस जारी किया है जिसके तहत 5 मार्च 2026 तक जहाजों पर लदे रूसी मूल के कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों को भारत तक पहुंचाने और बेचने की अनुमति दी गई है। यह छूट 4 अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगी।
बेसेंट ने भारत को अमेरिका का महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए कहा, “भारत अमेरिका का आवश्यक भागीदार है, और हमें पूरी उम्मीद है कि नई दिल्ली अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाएगी।”बेसेंट के मुताबिक यह कदम जानबूझकर बहुत सीमित अवधि के लिए उठाया गया है ताकि रूस को इससे कोई बड़ा आर्थिक लाभ न मिल सके, क्योंकि यह केवल उन तेल खेपों के लेनदेन की अनुमति देता है जो पहले से समुद्र में फंसी हुई हैं।”इस घोषणा के बाद अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (ओएफएसी) ने एक विशेष लाइसेंस जारी किया है जिसके तहत 5 मार्च 2026 तक जहाजों पर लदे रूसी मूल के कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों को भारत तक पहुंचाने और बेचने की अनुमति दी गई है। यह छूट 4 अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगी।
दो सीनियर अमेरिकी अधिकारियों ने रॉयटर्स को बताया कि इस फैसले से वैश्विक तेल बाजार पर दबाव कम होगा. साथ ही तेल के संकट में भारत राहत की सांस ले पाएगा।2022 में रूस-यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद भारत रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया था लेकिन जनवरी से रिफाइनरी वाले कम खरीद रहे थे क्योंकि अमेरिका चाहता था कि रूस को पैसे न पहुंचे, इसके लिए वे दबाव डाल रहा था इस छूट से भारत को 25 फीसदी टैरिफ का खतरा भी टल गया और अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौता भी हो गया।