अदालत ने पुलिसकर्मी पर गोली चलाने के प्रयास से जुड़े मामले में एक व्यक्ति को बरी किया

राष्ट्रीय
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नयी दिल्ली: 26 जनवरी (ए)) दिल्ली की एक अदालत ने 2018 में द्वारका में रात के समय जांच अभियान के दौरान एक पुलिसकर्मी को लाइसेंसी पिस्तौल से गोली मारने की कोशिश करने के आरोप से एक व्यक्ति को यह कहते हुए बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष मामले को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वंदना जैन ने प्रभु कुमार को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 186 (लोक सेवकों के सार्वजनिक कार्यों के निर्वहन में विघ्न डालना), 353 (लोकसेवकों को डराने-धमकाने या हमला करने के लिए बल प्रयोग), 324 (खतरनाक हथियारों या साधनों से चोट पहुंचाना) और 307 (हत्या का प्रयास) तथा शस्त्र अधिनियम की धारा 27 (हथियारों और गोला-बारूद का अवैध उपयोग) और मोटर वाहन अधिनियम की धारा 185 (नशे की हालत में वाहन चलाना) के तहत आरोपों से बरी कर दिया।अदालत ने अभियोजन के सबूतों में गंभीर कमियां पाई।

मामला 31 अक्टूबर, 2018 को एक घटना से जुड़ा था, जब पुलिस अधिकारियों ने आरोप लगाया कि कुमार नामक व्यक्ति ने नशे की हालत में द्वारका के सेक्टर 21 अंडरपास के पास एक पिकेट पर पुलिसकर्मियों से बदतमीजी की, एक कांस्टेबल के अंगूठे को चोट पहुंचाई और फिर सहायक उप-निरीक्षक की ओर पिस्तौल तान दिया, हालांकि गोली नहीं चलाई।

अदालत ने 15 जनवरी के निर्णय में कहा, “अभियोजन पक्ष का यह कानूनी दायित्व है कि वह प्रत्येक अपराध को संदेह से परे साबित करे।”