काठमांडू: 29 अगस्त (ए) नेपाल में गत बुधवार को अचानक आई बाढ़ का पानी तो उतर गया है, लेकिन हृदय विदारक दृश्य लगातार सामने आ रहे हैं। अस्पतालों के बाहर बदहवास लोगों के कतार में खड़े होकर मृतकों की दीवारों पर चस्पा तस्वीरें देखने और परिजनों द्वारा कीचड़ एवं मलबे में अपने सामान की तलाश करने की तस्वीर आम है।
एक महिला क्षतिग्रस्त इमारतों के पास से अपने एक बच्चे को ले जाती दिखी। मलबे के बीच एक मृत कुत्ता पड़ा था।जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, लापता लोगों के रिश्तेदारों की उम्मीदें धूमिल होती जा रही हैं, जबकि बचावकर्मी लापता लोगों की तलाश में मुश्किल हालात का सामना कर रहे हैं।
पानी, कीचड़ और मलबे के तेज बहाव ने बुधवार को नेपाल के कस्बों और गांवों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे घर, गाड़ियां, सड़कें और पुल बह गए और पनबिजली परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा। अब देश इससे उबरने के लिए संघर्ष कर रहा है।इस हादसे में मरने वालों की संख्या शनिवार को 600 के पार पहुंच गई, जबकि 2,400 से अधिक लोग लापता हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में रुक-रुककर हो रही बारिश के बीच, बचाव दलों ने अपने त्वरित प्रयास के तहत लगभग 2,500 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। इनमें 163 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
परिवारों को इलाज के लिए भर्ती घायल लोगों की सूची देखते हुए अस्पतालों के बाहर कतार में खड़े देखा जा सकता था। वे किसी परिचित को खोजने की उम्मीद में ध्यान से नाम और तस्वीरें देख रहे थे।
उन्हें जब बचे हुए लोगों में अपने प्रियजन नहीं मिलते, तो कई लोग भारी मन से एक दूसरी सूची मृतकों की तस्वीरों की ओर रुख करते हैं।इस बीच, बचावकर्मी चौबीस घंटे काम कर रहे हैं। वे कुछ जगहों पर बारिश का सामना करते हुए और दूसरी जगहों पर सूखती हुई कीचड़ को खोदते हुए उनलोगों की तलाश कर रहे हैं जो अब भी लापता हैं।
रात के अंधेरे में, नेपाल के गृह मंत्री सुदान गुरुंग ने अपर त्रिशूली 3ए जलविद्युत परियोजना स्थल पर खुदाई करने वाली मशीनों से मिट्टी हटवाने के काम की निगरानी की। यहां विनाशकारी बाढ़ के बाद सौ से अधिक लोग एक सुरंग में फंस गए थे।
समाचार पोर्टल ‘ऑनलाइन खबर’ के मुताबिक, नेपाली सेना ने सुरंग में फंसे 350 लोगों को पहले ही बचा लिया है।मध्य नेपाल के गांवों में तबाही का मंजर साफ दिख रहा है। इमारतें कई फुट कीचड़ में दबी हुई हैं, गाड़ियां मलबे में धंसी हुई हैं और सड़कें एवं अन्य बुनियादी ढांचे पानी और मलबे के तेज बहाव में बह गए हैं।
जो लोग बच गए हैं, उनकी सबसे पहली प्राथमिकता रहने की जगह खोजना, चिकित्सा मदद लेना और मलबे से जो भी सामान बचाया जा सके, उसे बचाना है।
प्रभावित गांवों से दिल दहला देने वाले दृश्य सामने आए हैं।नुवाकोट जिले के देवीघाट गांव में लोग अपना सामान ढूंढने के लिए गहरे कीचड़ और मलबे के बीच उतरे। मलबे के बीच टूटी-फूटी इमारतें और उखड़े हुए बिजली के खंभे थे, जबकि गाड़ियां कीचड़ में दबी हुई थीं।
एक महिला बिखरे हुए मक्के के पास बैठी दिखी, जबकि एक दूसरी महिला, जिसने गोद में बच्चा ले रखा था, टूटी-फूटी इमारतों और एक मरे हुए कुत्ते के पास से गुजरती नजर आई। एक आदमी गैस सिलेंडर लिए मलबे से भरे इलाके से गुजरता दिखा। यह एकमात्र ऐसी चीज थी, जिसे वह मलबे से बचा पाया था।
आसमान से खींची गई तस्वीरों में से एक में उफनती नदी के किनारे क्षतिग्रस्त इमारतें दिखाई दीं, जो बाढ़ से हुई तबाही के बड़े पैमाने को दर्शाती हैं।त्रिशूली में, सेना का राहत शिविर आपदा से प्रभावित लोगों के लिए मदद का एक बड़ा केंद्र बन गया है।
सेना के जवान बुजुर्गों और बच्चों की मदद करते हुए दिखे, जबकि अस्थायी चिकित्सा शिविरों में घायलों का इलाज किया जा रहा था। इन शिविरों में लापता, मृत और बचाए गए लोगों के बारे में जानकारी भी दी जा रही है।
खोज और बचाव कार्यों के लिए 11,000 से अधिक सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है, जिनमें 5,000 से अधिक नेपाली सेना के जवान शामिल हैं।देश के मौसम विभाग ने मध्यम दर्जे की बारिश की संभावना जताई है। इसकी वजह से बचावकर्मियों के सामने आने वाली चुनौती और भी कठिन होने की आशंका है।
