जयशंकर रूस के राष्ट्रपति पुतिन से मिले; व्यापार, ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति पर चर्चा की

अंतरराष्ट्रीय
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मॉस्को: 24 अगस्त (ए) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को मॉस्को में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों ने आर्थिक संबंधों पर चर्चा की, जिसमें व्यापार, ऊर्जा, उर्वरक और परमाणु सहयोग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया।

जयशंकर रूस की दो दिवसीय यात्रा के तहत रविवार को मॉस्को पहुंचे। यह यात्रा 12-13 सितंबर को ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नयी दिल्ली दौरे से पहले हो रही है।जयशंकर और पुतिन की बैठक को इसलिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि भारत और रूस कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं।जयशंकर ने कहा कि दोनों पक्षों ने इससे पहले अंतर-सरकारी आयोग की बैठक की, जिसमें उन्हें आर्थिक सहयोग के संबंध में “अच्छी रिपोर्ट” मिली।

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हमारे बीच आर्थिक सहयोग और व्यापार, ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु तथा अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग काफी आगे बढ़ा है। मुझे इस पर विस्तार से बात करने में खुशी होगी। कुल मिलाकर, मुझे लगता है कि हमारे बीच आर्थिक सहयोग काफी महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा है।”

रूस की सरकारी समाचार एजेंसी तास की खबर के मुताबिक, पुतिन ने कहा कि रूस भारत को उर्वरकों की आपूर्ति बढ़ा रहा है और वह ऐसा करते रहने के लिए तैयार है।

खबर में पुतिन के हवाले से कहा गया है, “हम भारतीय किसानों और कृषि क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। हम आपूर्ति बढ़ा रहे हैं और आगे ऐसा करते रहने के लिए तैयार हैं।”

उन्होंने कहा कि पिछले साल थोड़ी गिरावट के बाद इस वर्ष रूस और भारत के बीच व्यापार बढ़ा है।

रूसी राष्ट्रपति ने कहा, “मुझे यह देखकर खुशी हो रही है कि इस साल हमारे बीच व्यापार बढ़ा है। पिछले वर्ष इसमें थोड़ी गिरावट आई थी, लेकिन इस साल यह बढ़ रहा है।”

पुतिन ने कहा कि जयशंकर की यात्रा से रूस और भारत के बीच दशकों से बने रिश्तों की गहराई का पता चलता है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच लगभग सभी क्षेत्रों में सहयोग जारी है, जिसमें सरकारों, संसदों और व्यापार जगत के स्तर पर सहयोग भी शामिल है।

जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संदेश और शुभकामनाएं पुतिन तक पहुंचाईं। उन्होंने कहा कि मोदी शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में पुतिन से मिलने और फिर ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत में उनका स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं।

जयशंकर ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी एससीओ शिखर सम्मेलन में आपसे मिलने, फिर ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत में आपका स्वागत करने और बाद में आप दोनों की आपसी सुविधा के अनुसार सालाना शिखर बैठक करने के लिए उत्सुक हैं।”

एससीओ शिखर सम्मेलन 31 अगस्त से एक सितंबर तक किर्गिस्तान में आयोजित होगा जबकि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12-13 सितंबर को नयी दिल्ली में होगा।

इससे पहले जयशंकर ने रूस के उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव के साथ द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को और बढ़ावा देने के तौर-तरीकों पर चर्चा की।

व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग पर भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग के एक कार्यक्रम में जयशंकर ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 2021-22 में लगभग 13 अरब अमेरिकी डॉलर था जो 2025-26 में चार गुना बढ़कर लगभग 60 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया।

जयशंकर ने मंतुरोव के साथ इस कार्यक्रम की सह-अध्यक्षता की।

उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार में तेजी से हुई बढ़ोतरी के साथ-साथ व्यापार असंतुलन में भी काफी अंतर आया है, जो 6.6 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 50 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया है।

जयशंकर ने कहा, “इस असंतुलन को दूर करना आज हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है।”

उन्होंने कहा कि बाजार तक पहुंच बढ़ाने, शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं को हटाने, भुगतान तंत्र को मजबूत करने तथा कारोबार-से-कारोबार स्तर पर बेहतर जुड़ाव की दिशा में प्रगति इस असंतुलन को दूर करने और वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने के साझा लक्ष्य को हासिल करने के लिए अहम होगी।जयशंकर ने कहा, “भारत-रूस साझेदारी ने लगातार मजबूती और हालात के अनुसार ढलने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है।”

उन्होंने कहा, “जटिल अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य के बावजूद हमारे आपसी रिश्ते लगातार प्रगाढ़ होते गए हैं। यह उस आपसी हित और भरोसे को दर्शाता है, जो हमारी द्विपक्षीय साझेदारी की पहचान है।”

विदेश मंत्रालय ने शनिवार को एक बयान में कहा था कि यात्रा के दौरान जयशंकर के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव से भी मुलाकात करने का कार्यक्रम है।

यह यात्रा जयशंकर और लावरोव की मनीला में 22 जुलाई को हुई मुलाकात के एक महीने बाद हो रही है। दोनों नेता आसियान से जुड़ी मंत्रिस्तरीय बैठकों के दौरान एक-दूसरे से मिले थे, जिसमें उन्होंने आपसी संबंधों की समीक्षा की थी और यूक्रेन संघर्ष तथा पश्चिम एशिया के हालात पर विचारों का आदान-प्रदान किया था।

लावरोव के साथ बैठक के दौरान जयशंकर ने क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर भारत की “गहरी चिंता” भी दोहराई थी।