चेन्नई: तीन मार्च (ए
) पश्चिम एशिया में संघर्ष के चलते फंसे लोगों में से कई ने घर वापस लौटने पर राहत की सांस ली और संकट के भयावह अनुभव को याद किया।
संघर्षग्रस्त क्षेत्र से यहां पहुंचने वाले लोगों ने दुबई में अपने संक्षिप्त प्रवास के दौरान विस्फोटों की आवाज़ों और सड़कों के सुनसान हो जाने की घटनाओं को याद किया।अमेरिका और इजराइल के हमलों के जवाब में ईरान द्वारा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) तथा अन्य खाड़ी देशों पर हमला किए जाने से अनेक यात्री फंस गए।
घर वापस लौटे लोगों ने केंद्र और राज्य सरकार को धन्यवाद दिया।
न्यूयॉर्क से आईं शुभा को रविवार को चेन्नई लौटना था। उन्होंने बताया कि संघर्ष के बाद सड़कें सुनसान दिख रही थीं और दुबई में स्थिति ‘‘भयावह’’ थी।
उन्होंने यहां हवाई अड्डे पर पत्रकारों से कहा, ‘‘यहां वापस आना एक आजादी जैसा है। मैं न्यूयॉर्क से आ रही हूं। शनिवार को दुबई में मेरा ठहराव था। उसी दिन दोपहर करीब एक बजे, उन्होंने (एयरलाइन अधिकारियों ने) बताया कि दुबई का हवाई क्षेत्र बंद कर दिया गया है।’’
शुभा ने कहा, ‘‘एमिरेट्स एयरलाइंस और दुबई हवाई अड्डा अधिकारियों ने हमारी बहुत अच्छी देखभाल की तथा हमें तुरंत होटलों में पहुंचा दिया। हम वहां होटलों में ठहरे हुए थे। हालांकि, होटल पहुंचने के बाद हमें बताया गया कि दुबई हवाई अड्डे पर कुछ मलबा या छर्रे जैसी कोई चीज़ गिरी है जिससे कुछ नुकसान हुआ है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे प्रवास के दौरान भयावह स्थिति बनी रही क्योंकि हमें हर कुछ घंटे में धमाकों की आवाज सुनाई देती थी। रात में हमें मिसाइल दिखती थीं। आज हम सुरक्षित और जीवित घर वापस आकर बहुत खुश हैं।
परिवार के साथ दुबई घूमने गए चेन्नई निवासी कार्तिक ने कहा, ‘‘हम पिछले मंगलवार (24 फरवरी) को घूमने गए थे। हमें शनिवार को वापस लौटना था। लेकिन शनिवार को हमें हवाई क्षेत्र बंद होने की खबर मिली।’’
उन्होंने कहा कि हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण उड़ान संचालन में कुछ देरी हो सकती है, लेकिन उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि उड़ानें रद्द हो जाएंगी।
कार्तिक ने कहा, ‘‘हम उसी दिन होटल लौट आए और वहीं ठहरे। हमें मिसाइलों की आवाजें सुनाई दे रही थीं। शुक्र है कि हमें आज की यात्रा के लिए टिकट मिल गया और हम चेन्नई वापस आ गए।’’
वहीं, एक अन्य यात्री सैयद अली ने कहा, ‘‘खबर सुनते ही दुबई हवाई अड्डे पर हालात देखकर कई बच्चे रोने लगे। हालांकि, होटल अधिकारियों ने हमारी बहुत मदद की और हमें ठहरने की जगह दी।’’
तमिलनाडु के नागूर निवासी अली ने कहा, ‘‘लगभग 20,000 लोग लंबी कतारों में खड़े देखे गए और उन्हें विभिन्न होटलों में भेजा गया। हमें अपनी सुरक्षित वापसी के लिए कदम उठाने पर केंद्र और राज्य सरकारों दोनों का आभार व्यक्त करना चाहिए।