न्यायपालिका के सामने असली चुनौती जिला अदालतों के स्तर पर है: प्रधान न्यायाधीश

राष्ट्रीय
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नयी दिल्ली: 29 नवंबर (ए)) भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि न्यायपालिका के सामने असली चुनौती जिला अदालतों के स्तर पर है, जो न्याय चाहने वाले अधिकांश नागरिकों के लिए संपर्क का पहला पड़ाव है।

भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) द्वारा आयोजित एक सम्मान समारोह में बोलते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि किसी भी व्यवस्था की पहली चिंता यह होती है कि जिला अदालत वादियों को न्याय दिलाने में सक्षम हो।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘भारतीय न्यायपालिका के सामने असली चुनौती जमीनी स्तर पर है। जिला न्यायपालिका कितनी तेजी, मानवीयता और बुद्धिमत्ता से काम करती है और कितनी स्वतंत्रता और निडरता से न्याय प्रदान करती है, यह संपूर्ण न्यायिक ढांचे का सबसे महत्वपूर्ण घटक है।’’

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि 70 प्रतिशत वादी जिला स्तर पर ही अपना भाग्य तय किये जाने की उम्मीद करते हैं।

वैकल्पिक विवाद समाधान की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि यह पुरानी गलत धारणा कि मध्यस्थता का न्यायपालिका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, अब कोई भी स्वीकार नहीं करता।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मध्यस्थता इस पेशे का एक मजबूत स्तंभ बनती जा रही है। मुझे एहसास हुआ कि मध्यस्थता एक ऐसा सक्षम हथियार है, जो भारत में भी सफलता की कई कहानियां लिख सकता है।’’

उन्होंने कहा कि कानूनी पेशे में युवाओं की अच्छी संख्या को बनाए रखने की जरूरत है।