लखनऊ/गाजीपुर: 28 जुलाई (ए)
) उत्तर प्रदेश पुलिस ने मंगलवार को बताया कि गैंगस्टर से राजनेता बने दिवंगत मुख्तार अंसारी, उनके परिजनों, गिरोह के सदस्यों और सहयोगियों से जुड़े शस्त्र लाइसेंसों तथा हथियारों के सत्यापन अभियान में कथित तौर पर व्यापक अनियमितताएं सामने आने के बाद गाजीपुर में पांच प्राथमिकी दर्ज की गईं। एक बयान में यह जानकारी दी गयी।
पुलिस महानिदेशक (मुख्यालय) की ओर से जारी बयान के अनुसार, उत्तर प्रदेश विशेष कार्य बल (एसटीएफ) से प्राप्त खुफिया जानकारी के आधार पर राज्य स्तर पर जांच के आदेश दिए गए थे।
बयान में बताया गया कि जांच में अंसारी के परिवार, आईएस-191 गिरोह के सदस्यों एवं सहयोगियों को जारी शस्त्र लाइसेंसों तथा उनके आधार पर खरीदे गए हथियारों का सत्यापन कराया गया।
बयान के अनुसार, वाराणसी परिक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक वैभव कृष्ण की निगरानी में चलाए गए सत्यापन अभियान में अंसारी परिवार के पांच सदस्य, आईएस-191 गिरोह के 11 सदस्य एवं सहयोगी तथा 27 अन्य व्यक्ति शामिल थे, जिन पर फर्जी अभिलेखों के आधार पर शस्त्र लाइसेंस कथित तौर पर प्राप्त करने का आरोप है।
पुलिस ने 43 लाइसेंसधारकों से जुड़े 80 से अधिक हथियारों का भौतिक सत्यापन किया।
बयान के अनुसार, जांच में कथित तौर पर पाया गया कि हथियारों की खरीद-बिक्री से संबंधित मूल शस्त्र लाइसेंस फाइलें और अभिलेख गाजीपुर जिलाधिकारी कार्यालय से गायब हैं।
पुलिस के अनुसार, जांच में कुछ लाइसेंसधारकों और शस्त्र शाखा के अधिकारियों के बीच कथित मिलीभगत के भी संकेत मिले हैं, जिसके कारण हथियारों की वास्तविक स्थिति तथा उनके कथित दुरुपयोग को छिपाने के लिए अभिलेख गायब किए गए। पुलिस ने यह भी दावा किया कि एक मामले में आवेदक का वास्तविक पता छिपाकर फर्जी पते के आधार पर शस्त्र लाइसेंस प्राप्त किया गया।
इन निष्कर्षों के आधार पर गाजीपुर के कोतवाली और मोहम्मदाबाद थानों में भारतीय न्याय संहिता तथा शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत पांच प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।
बयान के अनुसार, मामलों में मुख्तार अंसारी के पुत्र अफजाल अंसारी का नाम कई शस्त्र लाइसेंसों और उनसे जुड़े अभिलेखों के कथित रूप से गायब होने के संबंध में दर्ज किया गया है।
मुख्तार अंसारी की पत्नी अफशा अंसारी का नाम भी लाइसेंस जारी करने और सत्यापन में कथित भूमिका को लेकर शामिल है।
बयान में अफशा अंसारी को फरार बताया गया है।
इसके अलावा पूर्व शस्त्र लिपिक, राजस्व अधिकारियों और पुलिसकर्मियों सहित कई वर्तमान एवं सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारियों को भी नामजद किया गया है।
पुलिस मुख्यालय के अनुसार, आरोपों में मूल अभिलेख गायब करना, सत्यापन के दौरान दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करना, फर्जी पते पर लाइसेंस जारी करना, आपराधिक साजिश तथा आवेदनों के कथित अवैध सत्यापन में सहयोग देना शामिल है।
पांचों मामलों की जांच के लिए गाजीपुर के अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया है।
एसआईटी को शस्त्र शाखा से जुड़े वर्तमान और पूर्व अधिकारियों की भूमिका की जांच कर दोषियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस ने बताया कि शस्त्र लाइसेंसों और हथियारों का भौतिक सत्यापन अभी जारी है तथा अनियमितताएं सामने आने पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी