नयी दिल्ली: 28 जुलाई (ए)
) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि केंद्र सरकार फौजदारी कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ को औपचारिक रूप से परिभाषित करने और इसे कड़ी सजा वाला एक अलग अपराध घोषित करने पर विचार कर सकती है।
‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर अपराध का व्यापक होता एक स्वरूप है, जिसमें ठग खुद को कानून प्रवर्तन अधिकारियों, अदालत के कर्मचारियों या सरकारी एजेंसियों के पदाधिकारी बताकर ऑडियो और वीडियो कॉल के जरिए पीड़ितों को डराते-धमकाते हैं। वे पीड़ितों को ‘डिजिटल मंच पर एक तरह से बंधक बना लेते हैं और उन पर पैसे देने का दबाव डालते हैं।