नयी दिल्ली: 16 अक्टूबर (ए) जंतर-मंतर की ओर मार्च करने के दौरान भीड़ जुटाने, आंसू गैस और पानी की बौछारों से बचने तथा हिरासत में लिए जाने से बचने पर अगर अंक मिलते तो कैसा होता? दिल्ली की सड़कों और जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शनों से प्रेरित होकर, मुफ्त ऑनलाइन वीडियो गेम पेश किए जा रहे हैं।
‘जंतर-मंतर चलो’ गेम में लोग प्रदर्शनकारी या पुलिसकर्मी में से किसी एक की भूमिका चुन सकते हैं, जबकि ‘भाग नेहा भाग’ ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा के जंतर-मंतर पहुंचने के प्रयासों से प्रेरित है। गेम बनाने वाले इन राजनीतिक घटनाक्रमों को गेमिंग के अनुभव में बदल रहे हैं।
एक अन्य गेम ‘जंतर-मंतर टू जेल’ में खिलाड़ियों को कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के सदस्यों अभिजीत दीप्तके, सौरव दास और आशुतोष रांका जैसी भूमिका निभानी होती है।
‘जंतर-मंतर चलो’ वीडियो गेम बनाने वाले बरेली निवासी 27 वर्षीय सूरज कुशवाह ने बताया कि उन्हें यह विचार समाचार देखते समय आया। वह क्लाउड गेमिंग कंपनी में काम करते हैं और प्रौद्योगिकी में गहरी रुचि रखते हैं।
कुशवाह ने ‘समाचार एजेंसी से कहा, ‘मैं समाचार देख रहा था और व्यंग्य के तौर पर मेरे मन में इस घटनाक्रम पर आधारित गेम बनाने का विचार आया।’
उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और गेमिंग संबंधी अपने ज्ञान का इस्तेमाल करते हुए महज डेढ़ दिन में यह गेम तैयार कर लिया।
इस गेम में खिलाड़ी प्रदर्शनकारी या दिल्ली पुलिसकर्मी की भूमिका चुन सकते हैं। प्रदर्शनकारियों को लोगों को जुटाकर जंतर-मंतर की ओर मार्च करना होता है। भीड़ जितनी बड़ी होती है, प्रदर्शनकारियों की ताकत उतनी ही बढ़ती है। वहीं, पुलिसकर्मी की भूमिका निभाने वाले खिलाड़ियों को अधिक से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना होता है।
एक अन्य गेम ‘भाग नेहा भाग’ 30 वर्षीय अनव नायर ने बनाया है। वह पटकथा लेखक और फिल्म निर्माता हैं तथा अपने भाई अक्षय नायर के साथ ‘विजलूप स्टूडियोज’ के सह-संस्थापक हैं। उनकी कंपनी ब्रांड के लिए ‘आईपी एड्रेस’ और एआई के रचनात्मक इस्तेमाल पर काम करती है।
नायर ने बताया कि उन्हें और उनके भाई को नेहा बोरा के जंतर-मंतर पहुंचने के प्रयासों और बार-बार हिरासत में लिए जाने की घटनाओं पर नजर रखते हुए इस गेम का विचार आया।
उन्होंने ‘ कहा, ‘हम देख रहे थे कि नेहा बोरा और अन्य प्रदर्शनकारी किस तरह जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। उन्हें हिरासत में लिया जाता था, लेकिन अगले ही दिन वे फिर उसी जगह पहुंच जाते थे।’
उन्होंने कहा, ‘मेरे भाई अक्षय ने मुझसे पूछा कि वे ऐसा कैसे कर पा रहे हैं। इसी सवाल ने मुझे इस घटनाक्रम पर गेम बनाने के बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया।’
नायर ने कहा, ‘मैंने शुरुआत में खुद गेम बनाने की कोशिश की, लेकिन वह मेरी अपेक्षा के मुताबिक काम नहीं कर रहा था। इसके बाद मैंने अपने भाई की मदद ली और उसने गेम का कोड तैयार किया। हमने इसका नाम ‘भाग नेहा भाग’ रखा। यह हमारी पसंदीदा जर्मन फिल्म ‘रन लोला रन’ (1998) से प्रेरित है।’
नायर ने बताया कि वे गेम में बदलाव करने की योजना बना रहे हैं, ताकि इसमें नेहा को सम्मानजनक ढंग से प्रस्तुत किया जा सके।
उन्होंने कहा कि गेम को अच्छी प्रतिक्रिया मिली है और कई लोग लिंक मांगने के लिए उन्हें संदेश भेज रहे हैं। नायर ने कहा, ‘हमें लिंक मांगने के लिए कई सीधे संदेश (डीएम) मिले हैं। अब तक करीब 2,700 सत्यापित खिलाड़ी यह गेम खेल चुके हैं।’
नायर बंधुओं ने ‘जंतर-मंतर टू जेल’ नाम का गेम भी बनाया है। इसमें इसे खेलने वाले लोग कॉजपा के सदस्य दीपके, दास और रांका में से किसी एक को चुन सकते हैं। गेम में जेल की सलाखें और नारंगी कुर्ते पहने पुलिसकर्मी ऊपर से गिरते हैं। खिलाड़ियों को इनसे बचते हुए ‘जवाबदेही’ और ‘लोकतंत्र’ लिखे सिक्के जुटाने होते हैं।
प्रदर्शनों से प्रेरित अन्य गेम में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का किरदार भी शामिल है।
