वाशिंगटन-तेहरान,18 जून (ए)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बुधवार को एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसके तहत तेहरान अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के अपने भंडार को कम करेगा और इसके बदले उसे अमेरिकी प्रतिबंधों से छूट दी जाएगी जिससे ईरान बिना किसी रोक के अपना तेल बेच सकेगा। अमेरिका और ईरान ने यह जानकारी दी।
समझौते की मध्यस्थता करने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि दोनों देशों के नेताओं द्वारा हस्ताक्षर करने के बाद युद्ध समाप्त करने संबंधी यह प्रारंभिक समझौता ‘‘तत्काल प्रभाव’’ से लागू हो गया है।समझौते में संघर्ष स्थायी रूप से समाप्त करने का आह्वान किया गया है। इसके साथ ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य को लेकर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए 60 दिन की वार्ता अवधि शुरू हो गई है। हालांकि, ट्रंप ने दोबारा हमले करने का विकल्प खुला रखा है।ऐसा प्रतीत होता है कि समझौते के तहत ईरान को शुरुआत में ही कई बड़े लाभ दिए गए हैं, जबकि बदले में उससे बहुत कम हासिल किया गया है।
यह समझौता कई दिनों से गोपनीयता और भ्रम की स्थिति में घिरा रहा था।
अमेरिकी अधिकारियों ने सप्ताहांत में ट्रंप और उपराष्ट्रपति जे. डी. वेंस द्वारा इस समझौते पर डिजिटल हस्ताक्षर किए जाने की जानकारी देने के बाद भी इसकी शर्तों का खुलासा करने से इनकार कर दिया था।
ट्रंप ने बुधवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ वर्साय महल में रात्रिभोज के दौरान समझौते की कागजी प्रति पर हस्ताक्षर किए। वर्साय में पहले भी युद्ध या क्षेत्रीय विवाद समाप्त करने वाले कई ऐतिहासिक समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ ने शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर समारोह आयोजित करने की योजना बनाई थी लेकिन अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान की ओर से परस्पर विरोधी जानकारी सामने आने के बाद अब यह स्पष्ट नहीं है कि समारोह होगा या नहीं।
ट्रंप ने फ्रांस में जी7 के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद वर्साय में आयोजित रात्रिभोज से निकलते समय कहा, ‘‘इस पर हस्ताक्षर हो गए हैं।’’
‘व्हाइट हाउस’ के एक सहयोगी द्वारा ऑनलाइन साझा किए गए वीडियो में मैक्रों के बगल में बैठे हुए ट्रंप समझौते की कागजी प्रति पर हस्ताक्षर करते नजर आ रहे हैं। इसके बाद उन्होंने अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो को दस्तावेज और कलम सौंप दिए तथा कमरे में मौजूद लोगों ने तालियां बजाईं।
मैक्रों की ओर से सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो के अनुसार, ट्रंप ने हस्ताक्षर करने से ठीक पहले कहा, ‘‘यह आसान नहीं था।’’
ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी ‘आईआरएनए’ के अनुसार, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने तेहरान में समझौते पर हस्ताक्षर किए। एजेंसी ने ट्रंप और पेजेश्कियन के हस्ताक्षर वाला समझौता दिखाते हुए ईरानी राष्ट्रपति की तस्वीरें भी जारी कीं जिसमें वह ‘‘गंभीर मुद्रा में’’ नजर आ रहे हैं।
समझौते का आधिकारिक पाठ अब तक जारी नहीं किया गया है। कई दिनों तक इसे गोपनीय रखे जाने के बाद, अमेरिकी अधिकारियों ने नाम उजागर न करने की शर्त पर पत्रकारों को इसके मसौदे के बारे में जानकारी दी।
इसके बाद ईरान के सरकारी टेलीविजन ने भी समझौते का एक पाठ जारी किया जो काफी हद तक अमेरिका की ओर से जारी जानकारी के अनुरूप था।
समझौते के अधिकतर प्रावधानों के तहत युद्ध से पहले की स्थिति बहाल होगी। इनमें युद्ध समाप्त करना, तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता फिर शुरू करना तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना शामिल है। दुनिया में तेल और प्राकृतिक गैस व्यापार के लिए महत्वपूर्ण इस मार्ग के बंद होने से बड़ा ऊर्जा संकट उत्पन्न हो गया था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्य पूर्व में जारी संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से ईरान के साथ एक महत्वपूर्ण शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। समाचार एजेंसी एएफपी से बातचीत में एक अमेरिकी अधिकारी ने इसकी पुष्टि की।अधिकारी के अनुसार, फ्रांस के वर्साय पैलेस में जी7 शिखर सम्मेलन के बाद फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन के साथ रात्रिभोज के दौरान ट्रंप ने समझौते पर व्यक्तिगत रूप से हस्ताक्षर किए। उधर ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने कहा कि इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन के मसौदे को राष्ट्रपतियों के हस्ताक्षरों के साथ अंतिम रूप दे दिया गया है। अब समझौते के कार्यान्वयन का परीक्षण करने का समय है।आईआरएनए समाचार एजेंसी ने ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाक़ाई के हवाले से पुष्टि की है: “इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन पर दोनों राष्ट्रपतियों के हस्ताक्षर हो चुके हैं। अब समझौते के व्यावहारिक कार्यान्वयन को सत्यापित करने का समय है।” बाक़ाई ने यह भी कहा कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने और व्यक्तिपरक या भ्रामक अनुवादों से बचने के लिए दस्तावेज़ पर अंग्रेजी और फारसी दोनों भाषाओं में हस्ताक्षर किए गए हैं।
पहले, एक और औपचारिक हस्ताक्षर समारोह 19 जून को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित करने की योजना थी। हालांकि, 17 जून को फ्रांस में दोनों राष्ट्राध्यक्षों द्वारा व्यक्तिगत रूप से दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने के बाद, ईरान ने कहा कि स्विट्जरलैंड में बैठक की अब कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि वर्तमान दस्तावेज़ पहले से ही सबसे बाध्यकारी है।
इस ज्ञापन में एक विशिष्ट शांति रूपरेखा तैयार की गई है, जिसके तहत संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान अंतिम समझौते पर पहुंचने के लिए 60 दिनों तक चलने वाली वार्ता में शामिल होने पर सहमत हुए हैं। इस दौरान युद्धविराम की अवधि बढ़ाई जाएगी, और यदि दोनों पक्ष आपसी सहमति पर पहुंचते हैं तो वार्ता की अवधि को आगे भी बढ़ाया जा सकता है। इसका अंतिम लक्ष्य संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक कानूनी रूप से बाध्यकारी प्रस्ताव पारित करना है ताकि स्थायी शांति सुनिश्चित हो सके।
समझौते के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक सभी मोर्चों पर सैन्य
अभियानों की तत्काल समाप्ति और संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में तनाव कम करना है। विशेष रूप से, समझौते के तहत वैश्विक तेल व्यापार के लिए महत्वपूर्ण जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को तत्काल फिर से खोलना और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी हटाना अनिवार्य है। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने इस बात पर जोर दिया कि समझौते की कुंजी जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और ईरान को अपने शेष परमाणु सामग्री को नष्ट करने की प्रतिबद्धता पूरी करने के लिए बाध्य करना है।
ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इसके बदले में, अमेरिका और उसके सहयोगी तेहरान के सकारात्मक कदमों के आधार पर आर्थिक प्रतिबंधों में धीरे-धीरे ढील देंगे। एक आशाजनक योजना भी तैयार की गई है, जिसके तहत युद्ध के बाद ईरान को उबरने और समृद्ध होने में मदद करने के लिए 300 अरब डॉलर का आर्थिक पुनर्निर्माण और विकास कोष स्थापित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से वैध उद्देश्यों के लिए ईरान की जब्त की गई संपत्तियों को जारी किया जाएगा।