नयी दिल्ली: 28 सितंबर (ए) इंडसइंड बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजीव आनंद ने कहा कि मतदाता सूची में उनके नाम का संबंधित रिकॉर्ड से मिलान नहीं हो पाया है और उन्हें मतदाता सूची से नाम हटाए जाने से बचने के लिए सुनवाई में शामिल होने को कहा गया है।
आनंद ने रविवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मुझे बताया गया है कि मतदाता सूची में मेरे नाम का पिछली मतदाता सूची के रिकॉर्ड से मिलान नहीं हो पाया है। जब से मैं मतदान करने के योग्य हुआ हूं, तब से मैंने हर चुनाव में मतदान किया है। मेरे पास पासपोर्ट, पैन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और आधार कार्ड है। अब मुझसे सुनवाई में शामिल होने को कहा जा रहा है, अन्यथा मेरा नाम हटा दिया जाएगा। मुझे ऐसा क्यों करना चाहिए?’’
उन्होंने एक अन्य पोस्ट में कहा, ‘‘भारतीयों के पास अपनी पहचान साबित करने के लिए इतने सारे प्रमाणपत्र हैं। आधार कार्ड, पैन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट। ऐसे में तो लगता है कि देश में पहचान का ही संकट है।’’
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के बीच निर्वाचन आयोग ने पिछले सप्ताह उन मतदाताओं की सुविधा के लिए कई फैसलों की घोषणा की, जिन्हें नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें घर-घर जाकर दस्तावेज एकत्र करना और दिल्ली तथा महाराष्ट्र में दावे एवं आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाना शामिल है।
दिल्ली के मतदाताओं के लिए दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अवधि बढ़ाकर 30 अक्टूबर कर दी गई है, जबकि महाराष्ट्र में इसे बढ़ाकर 12 अक्टूबर कर दिया गया है।
निर्वाचन आयोग ने यह भी कहा कि एसआईआर के दौरान जिन लोगों के नामों का मतदाता सूची में मिलान नहीं हो पाया है और तार्किक विसंगतियों के कारण नोटिस जारी किया गया है, उनके घर बूथ स्तर के अधिकारी (बीएलओ) जाएंगे और दस्तावेज एकत्र करेंगे। इसके बाद दस्तावेजों को ईसीआईनेट पर अपलोड किया जाएगा, ताकि निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) उस पर निर्णय ले सकें।
आयोग ने कहा कि जरूरत पड़ने पर मतदाता अपने परिवार के किसी भी वयस्क सदस्य को अपनी ओर से सुनवाई में शामिल होने के लिए अधिकृत कर सकता है। उसने कहा कि ऑनलाइन सुनवाई की सुविधाओं को और मजबूत किया जाएगा।