ईसी-एसआईआर मामला: त्रुटियों में सुधार न होने के कारण राहुल की याचिका सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुई

राष्ट्रीय
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नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (ए) बड़े पैमाने पर मार्च निकालने के बाद 12 अक्टूबर को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्ष के 10 प्रमुख नेताओं द्वारा दायर याचिका को मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया गया, क्योंकि रजिस्ट्री द्वारा बताई गई त्रुटियों को अभी तक सुधारा नहीं गया है।

शीर्ष अदालत की वेबसाइट के अनुसार, रजिस्ट्री ने 14 त्रुटियां रेखांकित की हैं, जिनमें मामले के सह-याचिकाकर्ता एवं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पहचान पत्र की स्पष्ट प्रति न होना शामिल है।

रजिस्ट्री ने याचिका में कुछ अपठनीय या गायब पन्नों की ओर भी इशारा किया था।

प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने मुलाकात को लेकर गांधी का अनुरोध ठुकराते हुए उन्हें भरोसा दिलाया था कि अगर न्यायिक पक्ष में याचिका दायर की जाती है तो उस पर जल्द सुनवाई होगी।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) और निर्वाचन आयोग से जुड़े मुद्दों, कई छात्रों की कथित मनमानी गिरफ्तारी, मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और ट्रेनों को रद्द करने के बारे में ज्ञापन सौंपने के लिए मुलाकात का अनुरोध किया था।

प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने मंगलवार को याचिकाकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि अगर त्रुटियां दूर कर ली जाती हैं, तो उनके मामलों को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।

उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन से कहा, ‘‘हम इन सभी मामलों को सूचीबद्ध करेंगे, लेकिन यह सुनिश्चित हो जाए कि (याचिका की) त्रुटियां दुरुस्त कर ली गई हैं।’’

शंकरनारायणन ने एक पत्रकार की ओर से मामले का विशेष उल्लेख किया था।

याचिकाकर्ताओं में गांधी और खरगे के अलावा तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले, शिवसेना (उबाठा) के नेता संजय राउत, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की सांसद महुआ माजी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एम.ए. बेबी और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के नेता ई.टी. मोहम्मद बशीर भी शामिल हैं।

याचिका में निर्वाचन आयोग, सीईसी ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को पक्षकार बनाया गया है।

याचिका में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने और गड़बड़ियों का आरोप लगाया गया है।

याचिका में अनुरोध किया गया है कि एसआईआर के दौरान किए गए बदलावों और हटाए गए नामों का एक तय समय में स्वतंत्र ऑडिट करने के लिए एक स्वतंत्र समिति बनाई जाए, जिसकी अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपी जाए और तकनीकी विशेषज्ञ एवं गणमान्य नागरिक उनकी मदद करें। इसमें यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि कानून के मुताबिक, बिना नोटिस और सुनवाई का उचित मौका दिए किसी भी मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाए। साथ ही, यह भी पक्का किया जाए कि पंजाब और दूसरे राज्यों में, जहां चुनाव होने हैं, वहां योग्य लोगों को कानून द्वारा तय आखिरी तारीख तक मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने की इजाजत दी जाए।

याचिका में कहा गया, ‘‘योग्य मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए, इस याचिका में उठाए गए मुद्दों पर विचार और निर्णय होने तक, देश भर में मतदाता सूची के जारी विशेष गहन पुनरीक्षण को रोकने का अंतरिम आदेश जारी किया जाए।’’

इससे पहले प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने ‘‘वोट चोरी’’ के आरोपों पर गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष खरगे से मिलने से इनकार करते हुए कहा था कि इस तरह के मामले उच्चतम न्यायालय में न्यायिक प्रक्रिया के तहत पहले से विचाराधीन हैं।

गांधी और खरगे ने प्रधान न्यायाधीश को पत्र लिखकर सोमवार को शाम चार से छह बजे के बीच मुलाकात का समय मांगा था। वे उन्हें एक ज्ञापन सौंपना चाहते थे, जिसमें ‘‘वोट चोरी’’ रोकने, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, एसआईआर को रोकने और मत पत्रों के जरिये चुनाव कराने की व्यवस्था वापस लाने का अनुरोध किया गया था।