भारत का आंतरिक सुरक्षा परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है: केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन

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हैदराबाद: सात अक्टूबर (ए) केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने शनिवार को कहा कि देश पिछले कई दशकों से जिन आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा था, उनका पारंपरिक परिदृश्य अब पूरी तरह बदल चुका है, जबकि नशीले पदार्थों, साइबर अपराध, अवैध प्रवासन और अन्य मुद्दे नयी चुनौतियों के रूप में उभरे हैं।

मोहन ने यहां सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (एसवीपीएनपीए) में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 78वें नियमित भर्ती बैच की दीक्षांत परेड को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का संदेश साझा किया, जिसमें आतंकवाद के प्रति ‘कतई बर्दाश्त नहीं’ की नीति, समयबद्ध कार्रवाई और खुफिया समन्वय को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया।

शाह के संदेश में कहा गया कहा कि केंद्र की ‘स्मार्ट बॉर्डर पहल’ के ज़रिए सीमाओं को सुरक्षित करने में युवा अधिकारियों की अहम भूमिका है, जिसमें आधुनिक प्रौद्योगिकी, एकीकृत निगरानी, ​​डिजिटल प्रणाली और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल शामिल है।

उन्होंने ‘नशा-मुक्त भारत’ का लक्ष्य हासिल करने के लिए नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले नेटवर्क के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई, बेहतर समन्वय, तकनीक-आधारित जांच और लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

शाह के संदेश में कहा गया कि एक पुलिस अधिकारी की असली पहचान उसके पद और लोकप्रियता से कहीं अधिक उसके आचरण, निष्पक्षता, कर्तव्यनिष्ठा तथा लोगों के भरोसे से बनती है।

उन्होंने कहा कि इसीलिए युवा अधिकारियों को प्रचार-प्रसार से दूर रहना चाहिए और नतीजों पर ध्यान देना चाहिए, तथा अपने काम को ही अपनी पहचान बनने देना चाहिए।

मोहन ने प्रशिक्षण पूरा कर रहे आईपीएस अधिकारियों से मादक पदार्थों की तस्करी, साइबर अपराध और घुसपैठ जैसी नयी आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार रहने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, ‘‘प्रौद्योगिकी क्षेत्र में, युवा अधिकारियों को सोशल मीडिया पर ऐसी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, जो अब बिल्कुल अलग रूप में सामने आ रही हैं।’’

मोहन ने कहा, ‘‘फर्जी संदेश, डीपफेक वीडियो और वास्तविकता को तोड़-मरोड़कर पेश करने वाली हर तरह की सामग्री अब सोशल मीडिया पर उपलब्ध है। इससे अनावश्यक रूप से लोगों को जुटाया जाता है और अंततः कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा होती है।”

उन्होंने कहा कि युवा अधिकारियों को प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा, तथा उन्हें ऐसे रचनात्मक समाधान खोजने के लिए संसाधन जुटाने होंगे जो कानून के दायरे में हों।

पारंपरिक आंतरिक सुरक्षा परिदृश्य में आए बड़े बदलाव पर मोहन ने कहा कि नक्सलवाद निर्णायक रूप से खत्म हो गया है, जबकि पूर्वोत्तर में विद्रोह अब न के बराबर रह गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में जो हो रहा है, वह विद्रोह नहीं है। यह मुख्य रूप से जातीय संघर्ष है।’’

मोहन ने कहा कि कई संघर्षविराम समझौतों और त्रिपक्षीय समझौतों के ज़रिए, पहले विद्रोही रहे ज़्यादातर गुट मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘देश के भीतर पनपने वाला आतंकवाद भी, कमोबेश, खत्म हो गया है। देश के कुछ हिस्सों को छोड़कर, बाकी कहीं भी बाहरी ताकतों से प्रेरित आतंकवाद अब देखने को नहीं मिलता।’’

दीक्षांत परेड में कुल 151 प्रशिक्षु अधिकारियों ने हिस्सा लिया, जिनमें 37 महिला अधिकारी शामिल थीं। इन 151 प्रशिक्षु अधिकारियों में पड़ोसी देशों के 16 विदेशी अधिकारी भी शामिल थे।