रियाद: तीन नवंबर (एपी) ईरान ने अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी को लगे झटके का जश्न मनाते हुए बुधवार को कहा कि अमेरिकी मतदाताओं ने ईरान के खिलाफ युद्ध को खारिज कर दिया है।
युद्ध को लेकर चिंताओं, खासकर ईंधन और अन्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से अमेरिकियों में पैदा हुई हताशा के कारण डेमोक्रेटिक पार्टी ने मंगलवार को हुए चुनाव में अमेरिकी संसद के दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल कर लिया। इसे ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने कहा कि जो लोग यह सोचते हैं कि अमेरिका में सत्ता या राजनीतिक दलों के समीकरण बदलने से इस्लामी गणराज्य के प्रति उसकी शत्रुता खत्म हो सकती है, वे ‘‘बहुत बड़ी गलतफहमी’’ में हैं।
खामेनेई ने सोशल मीडिया पर साझा एक पत्र में कहा, ‘‘यदि अब भी कुछ लोग यह उम्मीद लगाए बैठे हैं कि प्रभुत्ववादी व्यवस्था के व्यवहार में बदलाव आएगा या उसके भीतर राजनीतिक दलों एवं गुटों के समीकरण बदलने से कुछ फर्क पड़ेगा, या वे यह सोचते हैं कि अमेरिका को रियायतें देकर ईरानी राष्ट्र के प्रति उसकी शत्रुता खत्म की जा सकती है, तो वे बहुत बड़ी गलतफहमी में हैं।’’
फरवरी के अंत में युद्ध शुरू होने के बाद से खामेनेई सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं।
पिछले कई सप्ताह से पूरे क्षेत्र में इस आशंका को लेकर तनाव बना हुआ है कि अमेरिका लगभग दो महीने बाद ईरान के खिलाफ फिर से बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू कर सकता है। लड़ाई दोबारा शुरू होने से रोकने के लिए बातचीत जारी है। इस बीच क्षेत्र में अमेरिका के अन्य सहयोगी देश भी वाशिंगटन से युद्ध फिर शुरू नहीं करने का आग्रह कर रहे हैं। आठ महीने से अधिक समय पहले शुरू हुए इस युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को झकझोर दिया है और ईरान में भारी तबाही मचाई है।
खबरों के अनुसार, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान पर और हमले करने का दबाव बनाया है, जबकि ट्रंप कभी तो बड़े हमलों की धमकी देते हैं तो कभी समझौते पर जोर देते हैं।
ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालिबफ ने बुधवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘अमेरिकियों ने युद्ध को ‘नहीं’ कहा है और हम उनके इस संदेश का समर्थन करते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यदि अमेरिका सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने आकाओं और धमकी देकर अपनी बात मनवाने वालों के हितों की खातिर अपनी जनता की इच्छा से विश्वासघात करती है, तो उसे पता चल जाएगा कि हमारे ‘नहीं’ कहने के क्या भयावह परिणाम हो सकते हैं।’’
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिकी जनता ने स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने वाशिंगटन को इसे नजरअंदाज नहीं करने की चेतावनी दी।
प्रवक्ता ने कहा कि यदि अमेरिका वास्तविकता को नजरअंदाज करता रहा तो ‘‘इस गंभीर गलत आकलन के परिणाम अब तक देखे गए परिणामों से कहीं अधिक व्यापक होंगे।’’
