हिरासत में मौत के मामले में चार पुलिसकर्मियों की जमानत अर्जी खारिज

उत्तर प्रदेश प्रयागराज
Spread the love

प्रयागराज: चार अक्टूबर (ए) जौनपुर जिले में 2021 में पुलिस हिरासत में एक व्यक्ति की मौत के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश पुलिस के चार कर्मियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं।

न्यायमूर्ति समित गोपाल ने इन याचिकाओं को खारिज करते समय केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के आरोपपत्र में उल्लिखित आरोपों पर गौर किया जिसमें कहा गया है कि आरोपी पुलिसकर्मियों द्वारा गंभीर चोट पहुंचाए जाने से कृष्ण कुमार यादव की मौत हुई। सीबीआई ने आरोपपत्र में यह भी उल्लेख किया है कि यादव की मौत एक दुर्घटना या अज्ञात व्यक्तियों द्वारा हमले में हुई दिखाने के लिए झूठे रिकॉर्ड तैयार किए गए थे।

अदालत ने जयशील तिवारी, रामकृत यादव, राजकुमार वर्मा और अंगद प्रसाद चौधरी की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। ये चारों आरोपी, उन 11 पुलिसकर्मियों में शामिल हैं जिनके खिलाफ सीबीआई ने फरवरी, 2021 में पुलिस हिरासत में कृष्ण कुमार यादव की मौत के संबंध में आरोपपत्र दाखिल किया था।

इस मामले में 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 34 (साझा इरादा) और 120-बी (आपराधिक षडयंत्र) के तहत आरोपपत्र दाखिल किया गया था। लखनऊ में विशेष सीबीआई न्यायाधीश ने 18 सितंबर, 2024 को आरोप तय किए थे।

जौनपुर के बक्सा पुलिस थाना में 12 फरवरी, 2021 को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी जिसके मुताबिक, कृष्ण कुमार यादव को 11 फरवरी, 2021 को तड़के तीन बजे विशेष अभियान दल (एसओजी) टीम और तत्कालीन बक्सा एसएचओ द्वारा कथित तौर पर उनके घर से उठाया गया।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उस रात, कृष्ण कथित तौर पर खड़े होने में असमर्थ था और थाने में उसने अपनी मां से चिल्लाकर कहा कि पुलिस उसे मार डालेगी। इसके बाद, परिवार को सूचित किया गया कि कृष्ण की मौत हो गई है।

उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने आठ सितंबर, 2021 को इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया था। इसके बाद, सीबीआई ने स्वयं प्राथमिकी दर्ज की और 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया।

सीबीआई ने एम्स, नयी दिल्ली के मेडिकल बोर्ड की राय पर भरोसा किया जिसने कहा था कि यादव के शरीर पर कई जगह चोटें थीं और मौत का कारण शरीर पर लगी इन कई चोटों के मिले-जुले असर से आया झटका था।

न्यायमूर्ति समित गोपाल ने जमानत याचिका खारिज करते समय उच्चतम न्यायालय के 12 मार्च, 2024 के आदेश पर भी विचार किया जिसमें एक सह आरोपी जितेंद्र सिंह को मिली जमानत रद्द कर दी गई थी।

उच्च न्यायालय ने 30 सितंबर को दिए अपने आदेश में सभी चार आरोपियों की जमानत याचिका खारिज करते हुए निचली अदालत को सुनवाई में तेजी लाने और अनावश्यक रूप से सुनवाई टालने से बचने का निर्देश दिया।