तीनों सेनाओं की सर्वोत्तम प्रथाओं को शामिल किया जाएगा: सीडीएस ने सशस्त्र बलों के एकीकरण पर कहा

राष्ट्रीय
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नयी दिल्ली: 16 फरवरी (ए)) प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने सशस्त्र बलों के एकीकरण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा है कि इस प्रक्रिया के दौरान सेना का प्रत्येक अंग ‘‘अपनी खुद की पहचान’’ बनाए रखेगा और उसकी सर्वोत्तम प्रथाओं को शामिल किया जाएगा।

जनरल चौहान ने यहां शनिवार को आयोजित एक संवाद सत्र में हाल में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के उदाहरणों का भी हवाला दिया। इस ऑपरेशन के तहत सेना के तीनों अंगों – थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच एकजुटता प्रदर्शित हुई।वह यूएसआई द्वारा 14 और 15 नवंबर को आयोजित भारतीय सैन्य विरासत उत्सव में शामिल हुए जहां उनकी नयी किताब ‘रेडी, रेलेवेंट एंड रिसर्जेंट 2’ पर चर्चा हुई। उन्होंने संकेत दिया कि इसका तीसरा खंड भी जल्द आएगा जिसमें ऑपरेशन सिंदूर से संबंधित विवरण शामिल होंगे।

सैन्य एकीकरण की प्रगति पर पूछे जाने पर जनरल चौहान ने 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद हुई भारतीय कार्रवाई और सात मई तक की सैन्य तैयारी के उदाहरण दिए। भारतीय सशस्त्र बलों ने सात मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में कई आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे।

उन्होंने कहा कि इस अवधि में यह निर्धारित करने की आवश्यकता थी कि किन सैन्य संपत्तियों को पश्चिमी सीमा की ओर भेजना है और इसके लिए हवाई मार्ग से व्यापक स्तर पर आवाजाही की गई जिसे पूरी सुगमता से संपन्न किया गया। जनरल चौहान ने बताया कि तीनों सेनाओं के पास एमआरएसएएम और ब्रह्मोस जैसे साझा हथियार प्रणालियां उपलब्ध हैं और नौसेना ने भी सीमा पार की गई कुछ कार्रवाई में भूमिका निभाई थी।

सीडीएस ने कहा कि नियोजित एकीकरण के अनुरूप सेना में संयुक्त संस्कृति को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी संघर्ष को समझने के लिए भौतिक भूगोल के साथ मानव भूगोल को भी समझना आवश्यक है क्योंकि युद्ध में जीत विषमताएं पैदा करके ही मिलती है और यह नए क्षेत्रों में अधिक प्रभावी ढंग से संभव होती हैं।