ब्रिक्स शिखर सम्मेलन सफल रहा, हमने बंटी हुई दुनिया के बीच आम सहमति बनाई : जयशंकर

राष्ट्रीय
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नयी दिल्ली: 14 सितंबर (ए) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को कहा कि बंटी हुई दुनिया के बीच ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान एक आम सहमति बनायी गयी। उन्होंने भारत की अध्यक्षता में हुए इस शिखर सम्मेलन को सफल बताया।

यहां संवाददाताओं से बातचीत के दौरान जयशंकर ने उस मुद्दे पर भी बात की, जो निश्चित रूप से “उस दिन का सबसे कठिन विषय” था-पश्चिम एशिया में संघर्ष। उन्होंने कहा, “हम एक ऐसा बयान जारी करने में सफल रहे, जिस पर सभी सहमत थे।”

शनिवार को ब्रिक्स के सदस्य देशों ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ईरान के बीच गहरे मतभेदों को दूर करते हुए नयी दिल्ली घोषणापत्र को अपनाया। उन्होंने ईरान पर हुए हमलों के लिए अमेरिका का सीधे तौर पर जिक्र करने से भी परहेज किया।

घोषणापत्र के मसौदे पर बातचीत आखिरी समय तक चलती रही, क्योंकि शुरुआत में ईरान और यूएई, दोनों ही अपने रुख पर अड़े हुए थे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, अबू धाबी के युवराज मोहम्मद बिन जायद अल नाह्यान और समूह के अन्य शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में पहले दिन की बातचीत के आखिर में घोषणापत्र को अपनाने की घोषणा की।

जयशंकर ने कहा, “ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा था, जब दुनिया बहुत बंटी हुई है – दो बड़े संघर्ष हैं, भारी दूरियां हैं और लोगों की राय एवं हित बहुत अलग-अलग और मजबूत हैं। इस विभाजन के बावजूद, हमने आम सहमति बनाई। अगर आप देखें, तो उस समय सबसे मुश्किल मुद्दा पश्चिम एशिया का टकराव था। लेकिन हम एक ऐसा बयान जारी करने में कामयाब रहे, जिस पर सभी सहमत थे।”

उन्होंने कहा, “एक ऐसा बयान, जिसमें शांति, सुरक्षा, स्थिरता, लंबे समय तक आपसी समझ, वैश्विक व्यापार, आपूर्ति शृंखला और ऊर्जा की सुचारु आवाजाही तथा नागरिकों एवं नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा का आग्रह किया गया है।”

जयशंकर ने कहा कि बात केवल इतनी नहीं थी कि “हम एक ध्रुवीकृत दुनिया में आपसी समझ बनाने में सफल रहे”, बल्कि रविवार को समाप्त हुए शिखर सम्मेलन का पूरा माहौल, उसकी भावना और वातावरण ऐसा था कि “बहुत खुले और सहज संवाद” हुए।

उन्होंने किसी देश का नाम लिए बिना कहा, “नेताओं ने मुलाकात की, जो शायद अन्य परिस्थितियों में एक-दूसरे से नहीं मिल पाते। लेकिन इस शिखर सम्मेलन के दौरान वे मिले। और वास्तव में इससे महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर होने वाली बातचीत में काफी योगदान मिला।”

भारत मंडपम परिसर में आयोजित इस शिखर सम्मेलन से इतर कई द्विपक्षीय बैठकें भी हुईं।

रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों ने अबू धाबी के युवराज और ईरान के राष्ट्रपति के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने इसके महत्व को पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की पृष्ठभूमि से जोड़कर देखा।

जयशंकर ने कहा कि “पूरे देश और वास्तव में पूरी दुनिया ने कल ब्रिक्स भारत शिखर सम्मेलन का सफल आयोजन देखा।”

उन्होंने बताया कि शिखर सम्मेलन में कुल 32 प्रतिनिधिमंडल शामिल हुए—इनमें ब्रिक्स के सदस्य देशों के 11, साझेदार देशों के 10, क्षेत्रीय संगठनों के चार और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सात प्रतिनिधिमंडल शामिल थे।

जयशंकर ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन “मोदी के भारत की वैश्विक मेजबानी की मजबूत क्षमता” को दर्शाता है, क्योंकि अधिकतर प्रतिनिधिमंडल राष्ट्राध्यक्ष या शासनाध्यक्ष के स्तर पर शामिल हुए थे।

उन्होंने रूस, चीन, ईरान, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया और मिस्र के राष्ट्रपतियों के साथ-साथ अबू धाबी के युवराज और इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबिय अहमद अली का नाम लिया। जयशंकर ने कहा, “और जैसा कि आपने भी कार्यक्रम की तस्वीरों और मीडिया कवरेज में देखा होगा, इन सभी नेताओं के प्रधानमंत्री मोदी के साथ बहुत अच्छे व्यक्तिगत संबंध और संवाद थे।”

उन्होंने कहा कि शिखर सम्मेलन का अपना एक स्पष्ट एजेंडा था, जिसका मुख्य ध्यान ‘ग्लोबल साउथ’ के लिए अर्थव्यवस्था, विकास और प्रौद्योगिकी पर था।

जयशंकर ने कहा, “‘ग्लोबल साउथ’ के लिए मजबूती से आवाज उठाना—यह एक बहुत मजबूत संदेश था, जो सामने आया। और दो विषय, दो सत्र… पहला सत्र सुधार पर था और दूसरा लचीलेपन पर। ये ऐसे विषय थे, जो सभी को एकजुट करते हैं और जिन पर देशों के एक साथ आने की संभावना अधिक रहती है… यही एक कारण था कि हम आम सहमति बनाने में सफल रहे।”

उन्होंने आतंकवाद के मुद्दे पर ब्रिक्स समूह के रुख और नेताओं की ओर से पहलगाम आतंकी हमले की निंदा किए जाने का भी जिक्र किया।

जयशंकर ने कहा, “मैं यह भी कहना चाहता हूं कि एक मुद्दे पर बनी आम सहमति विशेष रूप से उल्लेखनीय थी—वह है आतंकवाद। ब्रिक्स ने स्पष्ट रूप से कहा कि आतंकवाद का कोई भी कृत्य आपराधिक है और उसने अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम हमले को अस्वीकार्य माना।”

उन्होंने कहा, “नेताओं ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की निंदा की, जिसमें सीमा पार से होने वाला आतंकवाद भी शामिल है। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ कतई बर्दाश्त न करने का रुख अपनाने पर जोर दिया और आतंकवाद से निपटने में दोहरे मानदंडों को खारिज किया।”

जयशंकर ने कहा, “कई लोगों ने कहा कि यह (शिखर सम्मेलन) नहीं हो पाएगा। लेकिन यह हुआ। यह नयी दिल्ली में हुआ और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया।