प्रयागराज: 14 जुलाई (ए)
) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि शादी का वादा पूरा नहीं होने मात्र से दो वयस्कों के बीच लंबे समय तक आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंधों को दुष्कर्म नहीं कहा जा सकता, विशेषकर तब जब मूल विवाद दीवानी और वित्तीय प्रकृति का हो।
इसके साथ ही, अदालत ने दो आपराधिक अपील स्वीकार करते हुए आरोपी को दुष्कर्म तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया।