नयी दिल्ली: सात फरवरी (ए)
) दिल्ली उच्च न्यायालय ने अभिनेता एवं उद्यमी विवेक ओबेरॉय के “व्यक्तित्व अधिकारों” को संरक्षण प्रदान करते हुए कई इकाइयों को उनका नाम, आवाज और तस्वीर व्यावसायिक या व्यक्तिगत लाभ के लिए इस्तेमाल करने से रोक दिया है।
ओबेरॉय के एक वाद पर पारित अंतरिम आदेश में न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला ने कहा कि उनकी “प्रसिद्ध, लोकप्रिय और व्यापक रूप से स्वीकृत व्यक्तित्व” को देखते हुए, यदि इस चरण पर कोई राहत नहीं दी गई तो उन्हें अपूरणीय क्षति होगी।
अदालत ने कहा कि ओबेरॉय का अपने व्यक्तित्व पर “कॉपीराइट” है, जिसमें उनकी तस्वीर, रूप, आवाज, नाम और हस्ताक्षर शामिल हैं। अदालत ने कहा कि उनके लंबे करियर और फिल्मों में शानदार सफलता ने उनकी प्रतिष्ठा, सद्भावना और स्वीकार्यता को स्पष्ट रूप से दर्शाया है।
अदालत ने पांच फरवरी को पारित आदेश में कहा, “इस प्रकार, याचिकाकर्ता इस चरण पर अपने व्यक्तित्व के सभी पहलुओं की सुरक्षा करने का अधिकार रखते हैं, जिन्हें कुछ व्यक्ति अनधिकृत रूप से इस्तेमाल कर सकते हैं, जिनमें से कुछ को इस मुकदमे में प्रतिवादी बनाया गया है।”
अदालत ने कई संस्थाओं को ओबेरॉय के ‘व्यक्तित्व/प्रचार अधिकार’ का उल्लंघन करने से रोक दिया, जिसमें उनके नाम – ‘विवेक ओबेरॉय’, आवाज, तस्वीर या व्यक्तित्व के अन्य पहलुओं का किसी भी व्यावसायिक या व्यक्तिगत लाभ के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डीपफेक या फेस मॉर्फिंग जैसे किसी भी तकनीक का उपयोग करके उपयोग करना शामिल है।
अदालत ने उनके व्यक्तित्व से जुड़े चित्रों वाले किसी भी उत्पाद, जैसे टी-शर्ट और पोस्टर, के निर्माण और साझाकरण पर भी रोक लगा दी।
अदालत ने यूट्यूब, मेटा प्लेटफॉर्म और एक्स कॉर्प सहित ऑनलाइन मंचों को 72 घंटे के भीतर सभी अनधिकृत सामग्री के लिंक हटाने का निर्देश दिया।
ओबेरॉय ने पहले अदालत का रुख किया था और कई इकाइयों द्वारा उनके नाम, छवि और व्यक्तित्व के अन्य पहलुओं का दुरुपयोग, विशेष रूप से छेड़छाड़ की गई और एआई-जनित सामग्री के लिए सुरक्षा की मांग की थी।
ओबेरॉय ने अपने वाद में कहा था कि कई इकाइयां कथित तौर पर उनके व्यक्तित्व अधिकारों का बिना अनुमति के दुरुपयोग कर रही हैं, जिससे उनकी साख और प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुंच रही है।
याचिका में कहा गया है कि कई संस्थाएं ‘इंस्टाग्राम’ जैसे सोशल मीडिया मंच पर उनके नाम और तस्वीरों का इस्तेमाल करके फर्जी खाते बना रही हैं और एआई का उपयोग करके ऐसे ‘डीपफेक’ और ‘मॉर्फ्ड’ किए गए वीडियो/तस्वीर बना रही हैं, जिनमें अशोभनीय और आपत्तिजनक सामग्री दिखाई गई है।
याचिका में कहा गया है, ‘‘ऐसे वीडियो में वादी के पारिवारिक जीवन के बारे में भी गलत और आपत्तिजनक सामग्री दिखाई जा रही हैं। ये अशोभनीय वीडियो जनता को गुमराह कर सकते हैं और उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर सकते हैं कि वीडियो में दिखाई गई बातें सच हैं।’’