डिंडोरी (मध्यप्रदेश): 24 जुलाई (ए) मध्यप्रदेश के डिंडोरी जिले के एक सरकारी अस्पताल में चूहे मारने की दवा खाने वाले युवक का उपचार करते समय पेट की सफाई की प्रक्रिया ‘गैस्ट्रिक लैवाज’ में कथित तौर पर बोतलबंद पेयजल का इस्तेमाल करने पर एक डॉक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
‘गैस्ट्रिक लैवाज’ को आम बोलचाल में ‘स्टमक पंपिंग’ कहा जाता है। यह आपात स्थिति में गले के रास्ते पेट तक नली डालकर उसमें मौजूद पदार्थ को स्टरलाइज्ड पानी या सलाइन की मदद से बाहर निकालने की प्रक्रिया है।
घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. मनोज पांडे ने बताया कि संबंधित डॉक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, लेकिन उन्होंने उन खबरों का खंडन किया जिनमें दावा किया गया था कि मरीज को बोतल का पानी नस के जरिए चढ़ाया गया।
उन्होंने ‘
कहा, ‘‘मरीज को बोतलबंद पानी अंत:शिरा (इंट्रावीनस) के माध्यम से नहीं दिया गया था।’’
डॉ. पांडे ने बताया कि हाल में अस्पताल में नियुक्त एमबीबीएस डिग्रीधारी कनिष्ठ चिकित्सक ने कथित तौर पर मरीज के परिजनों से पैकेज्ड पेयजल की बोतल मंगवाई, जबकि अस्पताल में ‘गैस्ट्रिक लैवाज’ के लिए आवश्यक पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। उन्होंने बताया कि डॉक्टर ने यह पानी राइल्स ट्यूब के माध्यम से इस्तेमाल किया।
अधिकारियों के अनुसार, 18 वर्षीय सत्यम यादव को बुधवार दोपहर चूहे मारने की दवा खाने के बाद अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराया गया था।
सूत्रों ने बताया कि डॉक्टर ने पहले एक नर्स से प्रक्रिया के दौरान बोतलबंद पानी का इस्तेमाल करने को कहा। नर्स द्वारा आपत्ति जताए जाने पर डॉक्टर ने कथित तौर पर खुद यह प्रक्रिया पूरी की।
मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने घटना को लेकर राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल हो गई है। उन्होंने मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की।