बनारसी कारीगरों का अस्तित्व खतरे में, सड़क से संसद तक उठाऊंगा उनकी आवाज: राहुल

राष्ट्रीय
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नयी दिल्ली: 10 दिसंबर (ए)) कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को बनारसी कारीगरों के ‘‘दर्द’’ का उल्लेख किया और कहा कि वह इस विषय को सड़क से लेकर संसद तक उठाएंगे।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने बनारसी कारीगरों के एक समूह से पिछले दिनों मुलाकात की थी। उन्होंने इस बातचीत का वीडियो बुधवार को जारी किया।उन्होंने कहा कि बनारस की साड़ियों के धागों में हिंदुस्तान की आत्मा बसती है, लेकिन आज इन्हीं धागों को बुनने वाले कारीगर उपेक्षा और बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि कारीगरों का दर्द वही है जो आज देशभर के छोटे दस्तकारों और हुनरमंदों की कहानी बन चुका है।

कारीगरों ने उनसे कहा-“हम भी तो Make in India हैं, लेकिन हमारी कहीं सुनवाई नहीं होती।”

राहुल के अनुसार, सबसे ज्यादा दुखद यह है कि जिन कारीगरों के क्षेत्र का प्रतिनिधित्व खुद प्रधानमंत्री करते हैं, वहीं कारीगर सरकारी अनदेखी से सबसे ज्यादा परेशान हैं।

सोशल मीडिया पोस्ट में राहुल ने बताया कि कारीगर अपना परंपरागत काम छोड़ने को मजबूर हो चुके हैं। बड़ी संख्या में लोग मजदूरी, रिक्शा चलाने और दिहाड़ी पर निर्भर हो रहे हैं।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए रोजगार के अवसर लगभग खत्म हो चुके हैं, जिससे वे दूसरे राज्यों में पलायन कर रहे हैं।राहुल गांधी ने कहा कि बनारस की एम्ब्रॉयडरी और बुनकरी जिनकी कलाकारी कभी दुनियाभर में मशहूर थी, आज मशीनें धूल खा रही हैं। कारीगरों ने उन्हें बताया कि सुइयां और कई कच्चे सामान तक चीन और जापान से मंगवाने पड़ते हैं।

राहुल ने आरोप लगाया कि सरकार कुछ चुनिंदा बड़े पूंजीपतियों को बढ़ावा देकर बाजार में एकाधिकार पैदा कर रही है, जबकि करोड़ों छोटे कारीगरों का व्यापार और अस्तित्व दोनों खतरे में हैं।

उन्होंने कहा कि देश को रोजगार देने के लिए लोकतांत्रिक उत्पादन मॉडल जरूरी है, और अगर यह तंत्र टूट गया तो भारत की अर्थव्यवस्था और करोड़ों हुनरमंदों की जिंदगी दोनों बर्बाद हो जाएंगी।