राम मंदिर ‘दान गबन’ मामले में आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

अयोध्या उत्तर प्रदेश
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अयोध्या: 25 जून (ए)) राम मंदिर में दान की रकम के गबन से जुड़े आरोपों को लेकर बृहस्पतिवार को यहां आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

इससे दो दिन पहले मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंपी थी।

पुलिस के एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को समाचार एजेंसी से पुष्टि की कि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रमाशंकर यादव, अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्र, रमाशंकर मिश्र, सुभाष श्रीवास्तव तथा मनीष कुमार यादव नामक व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है।

पुलिस के अनुसार चोरी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक षड़यंत्र समेत विभिन्न आरोपों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘ बताया कि एसआईटी ने कुछ ‘कठोर’ सिफारिशें की हैं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस मामले को लेकर ‘बहुत गंभीर’ हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी गठित की गई थी। यह कदम अयोध्या राम मंदिर को मिले चढ़ावे की रकम के दुरुपयोग के आरोप सामने आने के बाद उठाया गया था।

एसआईटी में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं।

राम जन्मभूमि कोतवाली पुलिस ने कुछ आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने अयोध्या में राम मंदिर में दिये गये दान और चढ़ावे में गबन के मामले को लेकर गुरुवार को मुकदमा दर्ज किये जाने का स्वागत किया। विहिप के अध्यक्ष आलोक कुमार ने ‘समाचार एजेंसी से कहा, ”हम मुकदमा दर्ज किये जाने का स्वागत करते हैं। हम यह उम्मीद भी करते हैं कि इस मामले में जांच तेजी से होगी और दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिलेगी।”

आलोक कुमार ने कहा कि इस विवाद से हिंदुओं की भावनाएं आहत हुईं। वीएचपी अध्यक्ष ने कहा, ”मैं इस बात से संतुष्ट हूं कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को जैसे ही एसआईटी की रिपोर्ट में आरोपियों के नाम पता चले, उसने मुकदमा दर्ज कराने में जरा भी देर नहीं की।”

मुकदमे में सिर्फ मामूली आरोपियों के ही नाम होने के आरोपों के बारे में आलोक कुमार ने कहा कि पुलिस जांच का दायरा सिर्फ एफआईआर में बताए गए नामों तक सीमित नहीं होता। उन्होंने कहा, ”जांच के दौरान अगर दूसरों की भूमिका सामने आती है तो पुलिस जांच का दायरा बढ़ाने और उनसे भी पूछताछ करने के लिए आजाद है बल्कि ऐसा करना उसका फर्ज है।”