उप्र में सभी कॉलेज, विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के लिए पोशाक व्यवस्था लागू करने के निर्देश

उत्तर प्रदेश लखनऊ
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लखनऊ: 21 मई (ए)) उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने बृहस्पतिवार को उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुशासन, कौशल आधारित शिक्षा और गुणवत्ता सुधार पर जोर देते हुए राज्य के सभी महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए पोशाक व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए।

प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि राज्यपाल के निर्देशों के अनुरूप राज्य भर के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पोशाक व्यवस्था का पालन अनिवार्य किया जाएगा।

एक बयान के अनुसार, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में बुधवार को जन भवन में जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया से संबद्ध शासकीय एवं वित्तपोषित महाविद्यालयों की समीक्षा बैठक एवं प्रस्तुतीकरण हुआ। बैठक में विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की शैक्षणिक, प्रशासनिक, आधारभूत एवं छात्रहित से जुड़ी व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।

राज्यपाल, राज्य सरकार द्वारा संचालित विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति भी हैं।

उन्होंने सभी महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए पोशाक व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए।

इसके साथ ही उन्होंने छात्राओं को रोजगारपरक एवं आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू करने पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से ब्यूटीशियन, मेहंदी, बिंदी निर्माण, अकाउंटेंसी तथा मोटे अनाज आधारित व्यंजन निर्माण जैसे पाठ्यक्रम शुरू करने के निर्देश दिए, ताकि छात्राएं स्वरोजगार प्राप्त कर सकें।

राज्यपाल ने कहा कि विद्यार्थियों को जैविक खेती के लिए प्रेरित किया जाए ताकि वे अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें तथा स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकें।

उन्होंने शिक्षकों को निर्देश दिया कि कोई भी शिक्षक ऐसा कार्य न करें जिससे शिक्षण पेशे की गरिमा को ठेस पहुंचे।

उन्होंने विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में ऐसी समितियां गठित करने को कहा, जिनके समक्ष छात्र-छात्राएं अपनी शिकायतें खुलकर रख सकें और उनका त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

राज्यपाल ने शिक्षकों के रिक्त पदों को शीघ्र भरने और जिन संस्थानों में शिक्षकों की कमी है वहां ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई कराने के निर्देश भी दिए।

उन्होंने निर्देश दिया कि आंगनबाड़ी केंद्रों, प्राथमिक विद्यालयों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और महाविद्यालयों सहित जहां भी पेयजल की समस्या हो, वहां स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

राज्यपाल ने कहा कि जिन महाविद्यालयों का बुनियादी ढांचा संतोषजनक नहीं है, वहां गुणवत्ता सुधार के लिए गुजरात की तर्ज पर सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल अपनाया जाए।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से ‘ज्ञान भारतम् अभियान’ के तहत पांडुलिपियों, भोजपत्रों और दुर्लभ पुस्तकों के डिजिटलीकरण एवं संरक्षण का कार्य किया जा रहा है, जिसके लिए संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी को नोडल संस्थान बनाया गया है।

राज्यपाल ने निर्देश दिया कि महाविद्यालयों में उपलब्ध पांडुलिपियों, भोजपत्रों और दुर्लभ पुस्तकों का पंजीकरण कराया जाए, ताकि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और विरासत को वैश्विक पहचान मिल सके।

इस बीच, उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि राज्यपाल के निर्देशों के अनुरूप सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पोशाक व्यवस्था अनिवार्य किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इससे छात्रों के बीच समानता और अनुशासन की भावना को बढ़ावा मिलेगा। मंत्री ने कहा कि पोशाक व्यवस्था लागू करने से सामाजिक और आर्थिक असमानता से उत्पन्न होने वाली हीनता या श्रेष्ठता की भावना को भी कम किया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार के साथ-साथ शिक्षण संस्थानों में अनुशासित और सकारात्मक वातावरण विकसित करना भी है।