होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं ईरान और ओमान

अंतरराष्ट्रीय
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काहिरा: पांच अगस्त (एपी) ईरान और ओमान होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए एक समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। दो अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

माना जा रहा है कि यदि यह समझौता होता है, तो इससे मौजूदा युद्ध को समाप्त करने की दिशा में भी प्रगति हो सकती है।समाचार एजेंसी ‘एसोसिएटेड प्रेस’ (एपी) से बातचीत में क्षेत्र के दो अधिकारियों ने बताया कि समझौते संबंधी प्रस्ताव के अनुसार, जहाज फारस की खाड़ी में प्रवेश ईरान के नियंत्रण वाले समुद्री मार्ग से करेंगे, जबकि बाहर निकलने के लिए ओमान के नियंत्रण वाले मार्ग का उपयोग करेंगे।

हालांकि, किसी भी समझौते का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि अमेरिका, ईरान के बंदरगाहों से अपनी नाकेबंदी हटाता है या नहीं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह ऐसा कोई समझौता स्वीकार नहीं करेगा, जिससे ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण मिल जाए।

अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंगलवार को उम्मीद जतायी कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर जल्द समझौता हो सकता है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ईरान और ओमान के बीच वार्ता में प्रगति हुई है, लेकिन अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है।

होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी के मुहाने पर स्थित एक रणनीतिक समुद्री मार्ग है, जहां से युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और प्राकृतिक गैस का परिवहन होता था। फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान द्वारा जहाजों पर किए गए हमलों के कारण यह मार्ग लगभग बंद हो गया है।

कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी ने भी मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से बातचीत की। कतर इस युद्ध को समाप्त कराने के लिए मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है।

इस बीच, ‘यूनाइटेड किंगडम मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर’ के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक मालवाहक जहाज पर ‘‘अज्ञात प्रक्षेपास्त्र’’ से हमला किया गया।

केंद्र ने बताया कि स्थानीय समयानुसार रात दो बजे यह हमला ओमान के बंदरगाह शहर अल खासाब से लगभग 37 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में हुआ, जिससे जहाज को नुकसान पहुंचा। यह स्पष्ट नहीं हो सका कि जहाज किस देश का था।

वहीं, इजराइल और लेबनान के अधिकारियों ने मंगलवार को रोम में बैठक कर अमेरिका की मध्यस्थता से हुए समझौते को लागू करने पर चर्चा की। इस समझौते के तहत दक्षिणी लेबनान से इजराइली सेना की वापसी और ईरान समर्थित हिज्बुल्ला को निशस्त्र करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी है।