घूसखोर पंडत’ नाम पर विवाद, नीरज पांडे ने प्रचार सामग्री वापस ली

मनोरंजन
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नयी दिल्ली/मुंबई: छह फरवरी (ए) हिंदी फिल्म “घूसखोर पंडित” के नाम को लेकर शुक्रवार को विवाद खड़ा हो गया। नेताओं और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने इसे जातिवादी बताया, जिसके बाद फिल्म निर्माता नीरज पांडे और मुख्य अभिनेता मनोज बाजपेयी को स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा। उन्होंने कहा कि उनका इरादा किसी को ठेस पहुंचाना नहीं था और वे फिल्म से संबंधित सभी प्रचार सामग्री वापस ले रहे हैं।

पांडे द्वारा निर्मित और बाजपेयी को एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी के रूप में चित्रित करने वाली इस फिल्म की घोषणा मंगलवार को मुंबई में नेटफ्लिक्स के एक कार्यक्रम के दौरान की गई।

फिल्म का टीजर जारी होने के बाद, इसके नाम ने सोशल मीडिया पर भारी रोष पैदा कर दिया, जिसमें कई उपयोगकर्ताओं ने कहा कि इसमें एक विशेष समुदाय को गलत तरीके से दिखाया गया है।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर फिल्म के निर्देशक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। मामला बृहस्पतिवार देर रात हजरतगंज थाने में दर्ज किया गया।

उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बयान में कहा कि यह कार्रवाई सामाजिक वैमनस्य फैलाने, धार्मिक और जातिगत भावनाओं को ठेस पहुंचाने और सार्वजनिक शांति भंग करने के प्रयास के आरोपों पर की गई है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि केंद्र ने नेटफ्लिक्स को फिल्म का टीज़र और अन्य प्रचार सामग्री सोशल मीडिया से हटाने के लिए कहा है।

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने ‘ कहा, ‘‘इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए केंद्र ने नेटफ्लिक्स को फिल्म का टीजर और अन्य सभी प्रचार सामग्री हटाने के लिए कहा है। इस तरह का कोई भी कृत्य, जो किसी भी समाज के विरुद्ध है, पूरी तरह से अस्वीकार्य है।’’

यह आगामी क्राइम थ्रिलर अजय दीक्षित उर्फ पंडत की कहानी है, जो एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी है। एक रात उसकी योजनाएं तब बिगड़ जाती हैं, जब वह खुद को दिल्ली के बीचों-बीच एक वैश्विक साजिश के बीच फंसा हुआ पाता है।

इसका निर्देशन रितेश शाह ने किया है, जिन्होंने पांडे के साथ मिलकर इसकी कहानी भी लिखी है। इसे पांडे ने अपने बैनर ‘फ्राइडे फिल्मवर्क्स’ के तहत प्रोड्यूस किया है।

बसपा और विश्व हिंदू परिषद दोनों ने ही फिल्म के नाम की निंदा की।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि फिल्म पर केंद्र सरकार को तुरंत प्रतिबंध लगाना चाहिए।

बसपा प्रमुख ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘यह बड़े दुख व चिंता की बात है कि पिछले कुछ समय से अकेले उत्तर प्रदेश में ही नहीं बल्कि अब तो फिल्मों में भी ‘पंडत’ को घूसखोर आदि बताकर पूरे देश में इनका अपमान व अनादर किया जा रहा है।’’

उन्होंने पोस्ट में कहा, ‘‘इससे समूचे ब्राह्मण समाज में इस समय जबरदस्त रोष व्याप्त है, इसकी हमारी पार्टी कड़े शब्दों में निंदा करती है।’’

विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि यह फिल्म समाज के ‘सबसे सम्मानित’ वर्ग पर हमला करती है और उन्होंने सरकार से इस मुद्दे पर गौर करने का आग्रह किया।

उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘सीरीज के नाम के जरिए, आप न सिर्फ हमारे हिंदू समाज के सबसे सम्मानित वर्ग पर हमला कर रहे हैं, बल्कि देश में नफरत और अशांति फैलाने की भी कोशिश कर रहे हैं। इसे तुरंत रोकें और माफी मांगें, नहीं तो हिंदू समाज आपके ऐसे बार-बार किए जाने वाले प्रयासों के खिलाफ लोकतांत्रिक कार्रवाई करने के लिए मजबूर होगा।’’

विवाद के बीच, पांडे और बाजपेयी ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर घोषणा की कि टीम ने फिल्म के प्रोमो इंटरनेट से हटा दिए हैं।

पांडे ने कहा कि यह फिल्म एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है और ‘‘पंडत’’ शब्द का इस्तेमाल केवल एक काल्पनिक पात्र के बोलचाल वाले नाम के तौर पर किया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘इस फिल्म की कहानी एक व्यक्ति के कृत्यों और उसकी पसंद/नापसंद पर केंद्रित है और यह किसी भी जाति धर्म या समुदाय को निशाना नहीं बनाती है। एक फिल्मकार के रूप में मैं अपने काम को जिम्मेदारी के साथ करता हूं, ताकि कहानियां विचारपूर्ण और सम्मानजनक हों।’’

पांडे ने स्वीकार किया कि फिल्म के नाम से दर्शकों के एक वर्ग को ठेस पहुंची है।

उन्होंने कहा, “हम समझते हैं कि फिल्म के नाम से कुछ दर्शकों को ठेस पहुंची है, और हम उनकी भावनाओं को गंभीरता से समझते हैं।”

उन्होंने कहा, “इन चिंताओं को ध्यान में रखते हुए, हमने फिलहाल सभी प्रचार सामग्री हटाने का फैसला किया है, क्योंकि हमारा मानना ​​है कि फिल्म को देखा जाना चाहिए और इसे उस कहानी के संदर्भ में समझा जाना चाहिए जिसे हम बताना चाहते हैं, न कि आंशिक झलक के आधार पर। मैं जल्द ही दर्शकों के साथ फिल्म साझा करने के लिए उत्सुक हूं।

फिल्म के मुख्य अभिनेता मनोज बाजपेयी ने कहा कि वह लोगों की भावनाओं और चिंताओं का सम्मान करते हैं और उन्हें गंभीरता से लेते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘जब किसी फिल्म या काम से कुछ लोगों को दुख पहुंचता है, तो कलाकार को रुककर सोचना चाहिए और लोगों की बात सुननी चाहिए। अभिनेता के तौर पर मैं किसी फिल्म में उसके किरदार और कहानी के जरिए जुड़ता हूं। मेरे लिए यह भूमिका एक ऐसे व्यक्ति को दिखाने की थी जो कमज़ोरियों और गलतियों से भरा इंसान है और जो धीरे-धीरे खुद को समझने की यात्रा पर निकलता है। यह फिल्म या किरदार किसी भी समुदाय के बारे में नहीं है।’’

‘‘ए वेडनेसडे’’, ‘‘स्पेशल 26’’ और ‘‘बेबी’’ जैसी चर्चित फिल्मों के लिए मशहूर पांडे ने कहा कि ‘‘घूसखोर पंडत’’ को पूरी ईमानदारी से केवल दर्शकों के मनोरंजन के उद्देश्य से बनाया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘जनभावना को देखते हुए फिल्म निर्माताओं ने प्रचार सामग्री को फिलहाल हटाने का फैसला किया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि लोगों की चिंताओं को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है।’’

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने बृहस्पतिवार को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को नोटिस जारी किया। यह नोटिस एक शिकायत के बाद दिया गया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि ओटीटी मंच पर रिलीज होने वाली आगामी फिल्म का नाम ‘‘नकारात्मक रूढ़ियों को बढ़ावा देता है’’ और ‘‘एक मान्यता प्राप्त सामाजिक समूह को बदनाम करता है।’’