आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवारों को चुनने की वजह बताने में दल विफल: एडीआर

राष्ट्रीय
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नयी दिल्ली: 11 सितंबर (ए) राजनीतिक दल इस साल की शुरुआत में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवारों को चुनने के कारणों का ब्योरा सार्वजनिक करने में नाकाम रहे। एडीआर के विश्लेषण के अनुसार, 1,405 उम्मीदवारों में से 191 के मामले में जरूरी जानकारी नहीं दी गई।

विश्लेषण में बताया गया कि जिन मामलों में राजनीतिक दलों ने आपराधिक मामलों के बावजूद उम्मीदवारों के चयन का कारण सार्वजनिक किया, उनमें भी अक्सर एक ही तरह के और कई बार बिल्कुल समान कारणों एवं शब्दों का इस्तेमाल किया गया।

‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (एडीआर) द्वारा 51 राजनीतिक दलों की ओर से दाखिल किए गए खुलासों के विश्लेषण के अनुसार, असम, केरलम, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों के साथ-साथ केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी में हुए चुनावों में कुल 8,848 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा।

चुनाव सुधार के लिए काम करने वाले संगठन एडीआर ने इन राजनीतिक दलों द्वारा मुकाबले में उतारे गए 3,539 उम्मीदवारों का विश्लेषण किया और पाया कि इनमें से 1,405 उम्मीदवारों ने अपने चुनावी हलफनामे में आपराधिक मामले घोषित किए थे। इनमें से 1,214 उम्मीदवारों के संबंध में राजनीतिक दलों ने आवश्यक प्रारूप सी-7 में खुलासा किया था, जबकि 191 (14 प्रतिशत) उम्मीदवारों के मामले में ऐसा कोई खुलासा उपलब्ध नहीं था।

तमिलनाडु में सबसे अधिक 72 उम्मीदवारों के मामले में आवश्यक खुलासा उपलब्ध नहीं था। इसके बाद पश्चिम बंगाल में 55, केरलम में 27, पुडुचेरी में 12 और असम में 10 उम्मीदवारों के मामले में खुलासा उपलब्ध नहीं था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सी-7 खुलासे का उद्देश्य मतदाताओं को केवल यह बताना नहीं है कि किसी उम्मीदवार के खिलाफ आपराधिक मामला या मामले दर्ज हैं, बल्कि यह जानकारी देना भी है कि पार्टी ने उस व्यक्ति को उम्मीदवार क्यों बनाया और बिना आपराधिक पृष्ठभूमि वाले किसी अन्य को उम्मीदवार क्यों नहीं चुना।

उच्चतम न्यायालय ने 2020 में राजनीतिक दलों को निर्देश दिया था कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के चयन के 72 घंटे के भीतर उन्हें चुनने के कारण सार्वजनिक किए जाएं। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये कारण उम्मीदवार की योग्यता और उपलब्धियों पर आधारित होने चाहिए, न कि केवल उम्मीदवार की ‘‘जीतने की संभावना’’ पर।

इसके बाद निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक दलों को यह जानकारी अपनी वेबसाइट, सोशल मीडिया अकाउंट और समाचार पत्रों में प्रकाशित करने का निर्देश दिया।

तमिलनाडु में एडीआर द्वारा विश्लेषण किए गए 1,162 उम्मीदवारों में से 473 ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए थे, जबकि 72 उम्मीदवारों के मामले में आवश्यक खुलासा उपलब्ध नहीं था। पश्चिम बंगाल में विश्लेषण किए गए 1,516 उम्मीदवारों में से 559 ने आपराधिक मामले घोषित किए थे और 55 उम्मीदवारों के मामले में आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं थी।

केरलम में एडीआर द्वारा विश्लेषण किए गए 431 उम्मीदवारों में से 268 ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए थे, जबकि 27 उम्मीदवारों के मामले में आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं थी। असम में विश्लेषण किए गए 318 उम्मीदवारों में से 66 ने आपराधिक मामले घोषित किए थे, जबकि 10 उम्मीदवारों के मामले में आवश्यक सी-7 खुलासा उपलब्ध नहीं था।

पुडुचेरी में एडीआर द्वारा विश्लेषण किए गए चुनाव लड़ने वाले 112 उम्मीदवारों में से 39 (35 प्रतिशत) ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए थे, जबकि 12 (31 प्रतिशत) उम्मीदवारों के मामले में इसके कारण बताए गए थे।

एडीआर ने यह भी पाया कि आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवारों के चयन के लिए राजनीतिक दलों द्वारा दिए गए कारण अक्सर एक जैसे या दोहराव वाले थे, न कि उन खास उम्मीदवारों से जुड़े हुए।

इन खुलासों में आम तौर पर उम्मीदवार की सार्वजनिक छवि, सामाजिक कार्य, अनुभव, लोकप्रियता, योग्यता और उस सीट के लिए उपयुक्तता जैसे कारणों का उल्लेख किया गया था। हालांकि, कई मामलों में एक से अधिक उम्मीदवारों के लिए एक ही शब्दावली का इस्तेमाल किया गया।