कीव: 24 फरवरी (एपी) यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के चार साल मंगलवार को पूरे होने पर यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि रूस ‘यूक्रेनवासियों को तोड़ नहीं पाया है’ और न ही वह यह जंग जीत पाया है। इस आक्रमण ने यूक्रेन और उसके सहयोगियों के संकल्प की कड़ी परीक्षा ली है तथा रूस की महत्वाकांक्षा को लेकर यूरोपीय आशंकाओं को और बढ़ा दिया है।
इस बीच, रूसी सरकार के प्रमुख कार्यालय ‘क्रेमलिन’ के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आक्रमण जारी रहेगा।
भयंकर नुकसान के बावजूद यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि रूस न तो ‘यूक्रेनवासियों को तोड़ पाया है’ और न ही युद्ध जीत पाया है।
वाशिंगटन स्थित विचार मंच ‘इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर’ के अनुसार, जेलेंस्की ने कहा कि उनके देश ने रूस की बड़ी और बेहतर सुसज्जित सेना के हमले का सामना किया है और रूस ने इस बीच यूक्रेन के केवल 0.79 प्रतिशत क्षेत्र पर कब्जा किया है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, ‘‘आक्रमण की शुरुआत को याद करते हुए और आज की स्थिति पर विचार करते हुए, हमें यह कहने का पूरा अधिकार है: हमने अपनी स्वतंत्रता की रक्षा की है, हमने देश का अपना दर्जा नहीं खोया है।’’
उन्होंने यह भी कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ‘‘अपने लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर पाए हैं।’’
ज़ेलेंस्की ने कहा, “वह यूक्रेनवासियों को तोड़ नहीं पाये। उन्होंने यह युद्ध नहीं जीता है।’’
हालांकि, जैसे-जैसे इस विनाशकारी युद्ध का पांचवा वर्ष शुरू हो रहा है, द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद यूरोप के इस सबसे बड़े सशस्त्र संघर्ष के अंत के लिए अमेरिका के नेतृत्व में किए जा रहे राजनयिक प्रयास शांति संधि को संभव बनाने वाले किसी भी समझौते तक पहुंचते नजर नहीं आ रहे हैं।
पुतिन के व्यापक लक्ष्यों को लेकर बढ़ रही चिंताओं के बीच यूरोपीय नेताओं को यूक्रेन में अपने देशों की सुरक्षा खतरे में दिख रही है। उन्होंने मांग की है कि अमेरिका की मध्यस्थता से चल रही वार्ता में उनके नेताओं से परामर्श किया जाए।
जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने ‘एक्स’ पर लिखा, “चार साल से, यूक्रेनवासियों और सिर्फ उनके लिए ही नहीं, बल्कि हम सबके लिए हर दिन और हर रात एक बुरे सपने जैसी रही है, क्योंकि युद्ध यूरोप की दहलीज तक पहुंच चुका है।’’
उन्होंने कहा, “हम इसे (युद्ध को) तभी खत्म कर सकते हैं जब हम सब मिलकर मजबूत हों, क्योंकि यूक्रेन का भविष्य हमारा भविष्य है।”
पश्चिमी अधिकारियों और विश्लेषकों का कहना है कि पुतिन मान रहे हैं कि समय उनकी बड़ी सेना के पक्ष में है और पश्चिमी समर्थन धीरे-धीरे कम होता जाएगा तथा यूक्रेन का सैन्य प्रतिरोध अंततः खत्म हो जाएगा।
लेकिन फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों ने युद्ध को ‘रूस के लिए तिहरी विफलता: सैन्य, आर्थिक और रणनीतिक’ बताया।
मैक्रो ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘युद्ध ने नाटो को मजबूत किया है – वही विस्तार जिसे रूस रोकना चाहता था – उन यूरोपीय लोगों को एकजुट किया है, जिन्हें वह कमजोर करना चाहता था।’’
इस युद्ध ने यूक्रेन से परे कई देशों को घसीट लिया है, जिससे संघर्ष को एक वैश्विक आयाम मिल गया है और विकासशील देशों में कमी, भूख और राजनीतिक अस्थिरता के और भी बदतर होने का खतरा पैदा हो गया है।
मंगलवार को कीव का दौरा करने वाले यूरोपीय अधिकारियों में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लायन और फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब के साथ-साथ सात प्रधानमंत्री और तीन विदेश मंत्री शामिल थे।
कीव पहुंचने वाले अतिथियों की सूची में शामिल एकमात्र अमेरिकी लेफ्टिनेंट जनरल कर्टिस बजार्ड थे, जो यूक्रेन में नाटो का प्रतिनिधित्व करने वाले एक अमेरिकी अधिकारी हैं।
यूक्रेन विदेशी सहायता के बिना रूस के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखने में असमर्थ है, इसलिए नाटो देश अब सैन्य सहायता प्रदान कर रहे हैं और अमेरिकी हथियार खरीद रहे हैं, क्योंकि ट्रंप प्रशासन ने वाशिंगटन की पिछली नीति से अलग होकर कीव को हथियार देना बंद कर दिया है।
ब्रिटिश सशस्त्र बलों के मंत्री अल कार्न्स ने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि हममें से कोई भी (युद्ध शुरू होने पर) इसके व्यापक पैमाने और भयावहता का अनुमान लगा पाया था।’’