राज्यसभा में सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक पारित

राष्ट्रीय
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नयी दिल्ली: एक अप्रैल (ए)

) राज्यसभा ने बुधवार को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के अधिकारियों की सेवा शर्तों एवं पदोन्नति से जुड़े एक विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया तथा सरकार की ओर से भरोसा दिलाया गया कि यह कानून बनने के बाद इन बलों का बेहतर प्रबंधन होगा और कार्यकुशलता बढ़ेगी।

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि यह विधेयक इसलिए लाया गया है ताकि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में काडर का बेहतर प्रबंधन कर इसकी कार्यकुशलता को बढ़ाया जा सके।

इस विधेयक में प्रावधान है कि महानिरीक्षक रैंक के कुल पदों में से 50 प्रतिशत पद, अतिरिक्त महानिदेशक रैंक के पदों में से कम से कम 67 प्रतिशत पद और विशेष महानिदेशक और महानिदेशक रैंक के सभी पद प्रतिनियुक्ति पर भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारियों द्वारा भरे जाएंगे।

आज उच्च सदन में चर्चा की शुरुआत करते हुए, टीएमसी के साकेत गोखले ने कहा कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) को व्यापक रूप से देश की रक्षा की पहली पंक्ति माना जाता है।

उन्होंने कहा कि सीएपीएफ कर्मियों को रेगिस्तान, उच्च ऊंचाई वाले बर्फीले क्षेत्रों और अन्य दुर्गम इलाकों सहित बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में तैनात किया जाता है।

श्री गोखले ने कहा कि इन बलों को अक्सर अर्धसैनिक बल कहा जाता है क्योंकि उनकी भूमिकाएं और जिम्मेदारियां नागरिक पुलिस की तुलना में सशस्त्र बलों से अधिक मिलती-जुलती हैं।

उन्होंने विधेयक की नीतियों पर चिंता व्यक्त की, जिसके तहत आईपीएस अधिकारियों को सीएपीएफ के भीतर शीर्ष नेतृत्व पदों पर नियुक्त किया गया है।

भाजपा के बृज लाल ने कहा कि विधेयक में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में ग्रुप ए जनरल ड्यूटी अधिकारियों के लिए एक समान और एकीकृत ढांचा स्थापित करने का प्रस्ताव है।

उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य भर्ती और सेवा शर्तों में एकरूपता लाना, कानूनी सशक्तिकरण को बढ़ाना और सेवा संबंधी मामलों में मुकदमेबाजी को कम करना है।

भाजपा के डॉ. अजीत माधवराव गोपचडे ने कहा कि यह सिर्फ एक कानून का मसौदा नहीं है, बल्कि यह भारत के सुरक्षा ढांचे को वर्षों की उपेक्षा से बाहर निकालने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

उन्होंने कहा कि दशकों से कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) को खंडित कानूनों के तहत काम करने दिया। उन्होंने कहा कि कोई एकीकृत ढांचा नहीं था, कोई स्पष्ट नीति नहीं थी और केवल भ्रम, देरी और अंतहीन मुकदमेबाजी थी