नयी दिल्ली: 19 जनवरी (ए)
) उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय को उत्तर प्रदेश के विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के खिलाफ घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दायर उनकी पत्नी की याचिका पर चार महीने में फैसला लेने का सोमवार को निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने यह बताए जाने के बाद भानवी सिंह की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया कि मामला उच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है।
बेंच ने कहा- उस दिन याचिकाकर्ता जल्दी निपटारे की मांग कर सकती हैं। अदालत मामले के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए इस पर विचार करेगी।” कोर्ट ने मामले की मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं की और सीधे सुनवाई से इनकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने यह समय-सीमा इसलिए तय की है, क्योंकि दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले निचली अदालत द्वारा राजा भैया को जारी किए गए समन पर रोक लगा रखी है।भानवी सिंह ने दिल्ली के सफदरजंग एन्क्लेव थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने अपने पति राजा भैया पर वर्षों से शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है। पुलिस के अनुसार, दंपती कई वर्षों से अलग-अलग रह रहे हैं। भानवी सिंह ने ससुराल वालों, खासकर सास पर भी उत्पीड़न का आरोप लगाया है। यह मामला घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत चल रहा है और इससे जुड़ी प्राथमिकी पहले ही दर्ज हो चुकी है।
भानवी सिंह ने अपनी शिकायत कहा- 20 मार्च, 2023 को मैंने अपने पति राजा भैया के खिलाफ क्रूरता और हिंसा के खिलाफ राष्ट्रीय महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। बाद में मैंने इस उम्मीद में शिकायत वापस ले ली थी कि चीजें बदल जाएंगी।
मेरा वैवाहिक जीवन फिर से शांतिपूर्ण हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 1 एक साल से लगातार जारी क्रूरता ने मुझे और ज्यादा आघात पहुंचाया है। जान से मारने की मिली धमकियों ने मुझे शिकायत दर्ज कराने पर मजबूर किया है।
भानवी सिंह ने बताया- मेरी शादी के 30 साल हो चुके हैं। इस दौरान मेरे पति ने कई बार मुझे शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी। मेरे पति अवध के भदरी एस्टेट से हैं। वर्तमान में यूपी से विधायक हैं। मैं भी बस्ती के पूर्व राजघराने से ताल्लुक रखती हूं।
ससुराल में मेरा सम्मान नहीं किया गया। सास मेरे वैवाहिक जीवन में दखल देती थीं। पति इस पर कोई ध्यान नहीं देते थे। तमाम अत्याचार सहने के बाद भी मैं शांत रही। एक साल में लगातार मेरे खिलाफ हमले हुए हैं। इसलिए मुझे सुरक्षा दी जाए।