नयी दिल्ली: 18 अगस्त (ए) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र और राज्य सरकारों से एक जनहित याचिका पर जवाब मांगा जिसमें प्रश्नपत्र लीक करने के मामलों में शामिल अपराधियों और उनके परिजनों की चल-अचल संपत्ति ज़ब्त करने का निर्देश देने का आग्रह किया गया है।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका पर केंद्र सरकार और राज्यों को नोटिस जारी किया। सुनवाई के दौरान, उपाध्याय ने कहा कि वह प्रश्नपत्र लीक मामलों में समयसीमा के भीतर जांच और मुकदमा सुनिश्चित करने के उपायों की अपनी मांग पर ज़ोर नहीं दे रहे हैं, क्योंकि ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पारित हो चुका है, जो पेपर लीक रोकने वाले कानूनों को और सख्त बनाता है।
शीर्ष अदालत ने सुनवाई की अगली तारीख 25 सितंबर निर्धारित कर दी।वकील अश्विनी कुमार दुबे के ज़रिए दायर इस याचिका में यह भी अनुरोध किया गया कि दोषियों और उनके परिवार के सदस्यों की पूरी संपत्ति का आकलन करने के लिए कदम उठाए जाएं तथा उसके अनुसार भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, धन शोधन निवारण अधिनियम, बेनामी संपत्ति अधिनियम और काला धन अधिनियम के उचित प्रावधान लागू किए जाएं।
याचिका में कहा गया, ‘‘भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए यह निर्देश और आदेश दिया जाए कि पेपर लीक के मामले में सज़ा एक साथ नहीं, बल्कि एक के बाद एक भुगती जाए। या फिर, विधि आयोग को निर्देश दिया जाए कि वह अंतरराष्ट्रीय तौर-तरीकों की पड़ताल करे और तीन महीने के भीतर पेपर लीक पर एक रिपोर्ट तैयार करे।’
