नयी दिल्ली, 14 जून (ए) त्रिपुरा की एक कम जानी-मानी राजनीतिक पार्टी एनसीपीआई रविवार को तब अचानक राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गई, जब तृणमूल कांग्रेस (टीमएसी) के 20 लोकसभा सदस्यों वाले एक बागी गुट ने इस पार्टी में विलय की घोषणा की। इस दल ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनावों में “अपने अधिकारों की रक्षा के लिए राजनीतिक दल-बदलुओं को नकारें” के नारे के साथ चार उम्मीदवार उतारे थे।
रिकॉर्ड बताते हैं कि नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) ने 2023 के त्रिपुरा चुनावों में चार सीटों – चावामानु, अंबासा, करमचारा और कैलाशहर – से चुनाव लड़ा था, और उसके उम्मीदवार या तो ‘नोटा’ (इनमें से कोई नहीं) से भी पीछे रहे या उन्हें नोटा से बस कुछ ही ज्यादा वोट मिले।
पार्टी के चुनावी पोस्टरों में यह संदेश था, ‘‘अपने अधिकारों की रक्षा के लिए, दलबदलु नेताओं को नकारें। राजनीतिक हस्तियों के बजाय समाज सेवकों का समर्थन करें।’’
साथ ही, मतदाताओं से पेन की निब वाले चुनाव चिह्न का बटन दबाने की अपील की गई।
विधानसभा चुनाव में 536 वोट पाने वाले इसके चावामानु से उम्मीदवार बरजेदा त्रिपुरा से जब ‘पीटीआई-भाषा’ ने संपर्क किया तो उन्होंने विलय की खबर पर हैरानी जताई।
बरजेदा ने बताया कि वह दिहाड़ी मजदूर हैं। उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘2023 में, कृष्ण देबबर्मा नाम के एक व्यक्ति ने मुझसे चुनाव के बारे में संपर्क किया। इसलिए मैंने चुनाव लड़ा। कई साल पहले तक, मैं कांग्रेस का समर्थक था।’’
टिप्पणी के लिए देबबर्मा से संपर्क नहीं हो सका।