प्रयागराज, 21 फरवरी (ए)
) प्रयागराज की एक विशेष पॉक्सो अदालत ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ बटुकों के साथ यौन शोषण के आरोपों की जांच के लिए झूंसी पुलिस थाने के प्रभारी को प्राथमिकी दर्ज करने का शनिवार को आदेश दिया।
आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज और अन्य द्वारा बीएनएसएस की धारा 173(4) के तहत दाखिल आवेदन पर विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम) विनोद कुमार चौरसिया की अदालत ने पिछले सप्ताह साक्ष्यों को देखने और पीड़ित बटुकों का बयान दर्ज करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।
याचिकाकर्ता ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ बीएनएस की धारा 69, 74, 75, 76, 79 और 109 के साथ ही पॉक्सो अधिनियम की धारा 3/5/9 और 17 के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने का आग्रह करते हुए यह आवेदन दाखिल किया था।
अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए झूंसी के थाना प्रभारी को तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने और कानून के मुताबिक मामले की जांच करने का आदेश दिया। यह जांच पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों का अनुपालन करते हुए की जाएगी।
आशुतोष ब्रह्मचारी ने कहा, ‘‘न्यायपालिका ने बच्चों के साथ हुए गलत कृत्यों के मामले की सुनवाई करते हुए झूंसी थाने को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है। अब हमें न्याय मिलेगा।’’
उन्होंने कहा, “आज से हम यहां से विद्या मठ (वाराणसी) के लिए सनातन यात्रा निकाल कर रहे हैं। हम दिखाएंगे कि विद्या मठ के पंचम तल पर किस तरह से बच्चों का यौन शोषण किया जाता है। बच्चों के साथ दुष्कर्म के बहुत सारे साक्ष्य वहां मौजूद हैं।”
ब्रह्मचारी ने कहा कि उन्होंने सभी साक्ष्य अदालत में पेश किए हैं और पुलिस को भी वह साक्ष्य उपलब्ध कराएंगे।
उल्लेखनीय है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद प्रयागराज के माघ मेला 2026 में मेला प्रशासन से टकराव को लेकर सुर्खियों में बने रहे। उन्होंने मेला प्रशासन पर मौनी अमावस्या का स्नान नहीं करने देने का आरोप लगाया था