रामपुर/लखनऊ: 14 अक्टूबर (ए) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जेल में बंद समाजवादी पार्टी (सपा) नेता आजम खान और उनके शैक्षणिक ट्रस्ट के खिलाफ एक नयी प्राथमिकी दर्ज की है, जिसमें कथित तौर पर उनके विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए करोड़ों रुपये के सरकारी धन का दुरुपयोग करने और उससे जुड़ी वित्तीय ‘अनियमितताओं’ का आरोप लगाया गया है। आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी।उत्तर प्रदेश पुलिस ने रामपुर में मंगलवार को खान, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, दो निजी संस्थाओं और अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। यह प्राथमिकी भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं– 61 (आपराधिक साज़िश), 316(5) (विश्वासघात कृत्य), 318(4) (धोखाधड़ी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज की गई।
खान और उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ 25 से ज़्यादा पुलिस प्राथमिकी पहले से दर्ज हैं।
माना जा रहा है कि प्रवर्तन निदेशालय ने खान और उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकी को एक साथ लाने का फैसला किया है, ताकि धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत उनके विरुद्ध ‘व्यापक’ कार्रवाई की जा सके।
इसी क्रम में ईडी के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय ने 10 अक्टूबर को धनशोधन निवारण अधिनियम की धारा 66(2) के तहत उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को ईमेल भेजकर खान के खिलाफ जुटाए गए ‘‘साक्ष्य’’ और जानकारी साझा की थी तथा उनके खिलाफ नयी प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया था।
सूत्रों ने ‘ बताया कि रामपुर पुलिस की नयी प्राथमिकी को प्रवर्तन संबंधी ईडी की सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) में जोड़ा जाएगा, जो 2019 में खान और उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ दर्ज की गई थी।
ईडी ने इस मामले में अगस्त में छापेमारी की थी और मंगलवार को रामपुर जेल में खान से पूछताछ भी की थी। खान जेल में बंद हैं।
खान अपने ट्रस्ट के मुख्य न्यासी हैं तथा उनके परिवार के सदस्य एवं अन्य सहयोगी भी न्यासियों में शामिल हैं। इस ट्रस्ट का मुख्यालय लखनऊ में है।
यह ट्रस्ट रामपुर जिले में मुहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी और एक निजी विद्यालय चलाता है। इस विश्वविद्यालय की स्थापना 2006 में हुई थी।
ईडी ने पुलिस को भेजे अपने पत्र में कहा है कि खान, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, ठेकेदार और दूसरे लोगों के कृत्य पीएमएलए के तहत अपराध की श्रेणी में आते हैं। यह पत्र हाल की प्राथमिकी का भी हिस्सा है।
इन कृत्यों में ‘सरकारी रसूख का इस्तेमाल करके’ सरकारी ठेका हासिल करना, सरकारी निर्माण कार्यों के लिए मिले कोष को विश्वविद्यालय में लगाना, विश्वविद्यालय के निजी परिसर में सरकारी फंड से काम करवाना और फंड को वापस ट्रस्ट तक पहुंचाना शामिल है।
ईडी ने उत्तर प्रदेश पुलिस को बताया कि आयकर विभाग की नवंबर 2023 की मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय परिसर में निर्मित इमारतों के निर्माण की लागत 494.46 करोड़ रुपये थी, जबकि 2013-14 से 2024-25 तक के न्यास के आयकर रिटर्न (आईटीआर) के अनुसार, न्यास ने कुल पूंजीगत खर्च केवल 78.32 करोड़ रुपये ही दिखाया है।
ईडी ने आरोप लगाया कि इस प्रकार, करीब 416.14 करोड़ रुपये की निर्माण लागत का हिसाब ट्रस्ट की घोषित आय और व्यय से नहीं मिलता है।
