जोहानिसबर्ग, 17 अक्टूबर (ए) भारत और दक्षिण अफ्रीका गहरे ऐतिहासिक संबंधों और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों से एक सूत्र में बंधे हैं। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने शुक्रवार को नॉर्दर्न केप प्रांत में वेदांता के ‘गैम्सबर्ग फेज-2 कंसंट्रेटर संयंत्र’ के उद्घाटन के अवसर पर यह बात कही।
इस कार्यक्रम में भारतीय उच्चायुक्त प्रभात कुमार और महावाणिज्य दूत रूबी जसप्रीत सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
कंसंट्रेटर संयंत्र आगे के प्रसंस्करण के लिए खनन किए गए अयस्क से मूल्यवान खनिजों को अलग करता है। गैम्सबर्ग संयंत्र में परिष्कृत जस्ता धातु के उत्पादन के लिए जिंक कंसंट्रेट को आगे प्रसंस्कृत किया जा सकता है।
केपटाउन स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि दूसरे चरण के इस विस्तार में लगभग 10 अरब दक्षिण अफ्रीकी रैंड (करीब 5,757 करोड़ रुपये) का निवेश शामिल है, जो इसे पिछले एक दशक में दक्षिण अफ्रीका के सबसे बड़े खनन निवेशों में से एक बनाता है।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, उद्घाटन समारोह के दौरान रामाफोसा ने कहा, ”यह अवसर दक्षिण अफ्रीका और भारत के बीच स्थायी संबंधों की भी एक महत्वपूर्ण पुष्टि है।”
उन्होंने कहा, ”हमारे दोनों देश गहरे ऐतिहासिक संबंधों, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और विकास के प्रति साझी प्रतिबद्धता से आपस में जुड़े हुए हैं।”
दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देशों की साझेदारी अब व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग तक फैल चुकी है। उन्होंने आगे कहा कि यह रिश्ता उपनिवेशवाद और उत्पीड़न के खिलाफ साझा संघर्ष से विकसित हुआ है।
रामाफोसा ने कहा, ”आज, 150 से अधिक भारतीय कंपनियों ने दक्षिण अफ्रीका में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, जो निवेश, रोजगार और औद्योगिक विशेषज्ञता में योगदान दे रही हैं।”
भारतीय समूह वेदांता ने 2011 में गैम्सबर्ग संपत्ति का अधिग्रहण किया था, और रामाफोसा ने फरवरी 2019 में खदान के पहले चरण का उद्घाटन किया था। वेदांत जिंक इंटरनेशनल दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया में समूह की जस्ता संपत्तियों का प्रबंधन करती है