लखनऊ: 14 अक्टूबर (ए) समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस ने बुधवार को उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव तीन महीने के भीतर कराने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश का स्वागत करते हुए सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर हार के डर से चुनाव टालने का आरोप लगाया।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष आराधना मिश्रा ने कहा कि अदालत का फैसला लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष आराधना मिश्रा ने कहा कि अदालत का फैसला लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि पंचायतों का पांच साल का कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद चुनाव नहीं कराए जाने से राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठते हैं।
मिश्रा ने आरोप लगाया कि चुनाव टालकर और निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए रखकर भाजपा सरकार लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावित कर रही है।
उन्होंने दावा किया कि सरकार को आशंका है कि ग्रामीण क्षेत्रों में उसके खिलाफ असंतोष पंचायत चुनावों में सामने आ सकता है और इसका असर आगामी विधानसभा चुनावों पर भी पड़ सकता है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के आरक्षण के लिए आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया पर भी चिंता जताई।
उन्होंने मांग की कि अदालत के निर्देश के अनुसार तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराए जाएं, ओबीसी आरक्षण के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय आंकड़े जुटाए जाएं तथा पिछड़े वर्गों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की जाए।
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन ने भी भाजपा पर चुनाव में हार के डर से पंचायत चुनाव बार-बार टालने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव मई या जून में हो जाने चाहिए थे, लेकिन सरकार अब तक इन्हें टालती रही।
हसन ने कहा, ”भाजपा हार के डर से लगातार पंचायत चुनाव टाल रही है।”
उन्होंने दावा किया कि पंचायत चुनावों के नतीजे विधानसभा चुनावों जैसे ही होंगे और भाजपा दोनों चुनावों में हारेगी।
इससे पहले, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बुधवार को राज्य निर्वाचन आयोग को उत्तर प्रदेश में पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव तीन महीने के भीतर कराने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की पीठ ने यह आदेश पारित किया।
