पेट्रोल, डीजल की कीमत बढ़ाने की अभी कोई योजना नहीं: तेल मंत्रालय

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नयी दिल्ली: 23 अप्रैल (ए)) सरकार ने विधानसभा चुनाव के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतें 25-28 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए जाने का दावा करने वाली खबरों को बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया और कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी दी, ‘‘ कुछ खबरों में पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ने की बात कही जा रही है। स्पष्ट किया जाता है कि सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।’’

पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर एक संवाददाता सम्मेलन में पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि कच्चे तेल और एलपीजी की अंतरराष्ट्रीय कीमतें बहुत अस्थिर रही हैं। फिर भी सरकार ने कीमतें नहीं बढ़ाई हैं।

उन्होंने बताया कि कच्चा तेल पिछले साल 70 डॉलर प्रति बैरल था और इस महीने औसतन 113 डॉलर से अधिक रहा। ”भारी वृद्धि के बावजूद सरकार ने कीमतें नहीं बढ़ाई हैं और सरकार का प्रयास कीमतों को स्थिर रखने का रहा है।”

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी दी, ‘‘कुछ खबरों में पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ने की बात कही जा रही है। स्पष्ट किया जाता है कि सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।’’

यह स्पष्टीकरण कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की एक रिपोर्ट के बाद आया है जिसमें संकेत दिया गया था कि पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में 29 अप्रैल को मतदान खत्म होने के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हो सकती है। कोटक ने कच्चे तेल की कीमत करीब 120 डॉलर प्रति बैरल रहने के आधार पर 25-28 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया था।

मंत्रालय ने कहा कि ऐसी खबरें ‘‘नागरिकों में डर एवं घबराहट पैदा करने के लिए पेश की जा रही हैं और ये भ्रामक व गुमराह करने वाली हैं।’’

एक्स’ पर मंत्रालय की ओर से यह भी कहा गया, ‘‘दरअसल, भारत ही एक ऐसा देश है जहां पिछले चार साल में पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ी हैं। भारत सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज बढ़ोतरी के प्रभाव से भारतीय नागरिकों को बचाने के लिए लगातार कदम उठाए हैं।’’

अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले तथा उसकी जवाबी कार्रवाई के बाद तेजी से बढ़ी हैं। इससे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक, फारस की खाड़ी को वैश्विक बाजारों से जोड़ने वाला तथा वैश्विक तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा संभालने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद हो गया है।

ईरान युद्ध के बाद तेल की कीमतें लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 119 डॉलर तक पहुंच गई थीं। हालांकि बाद में कुछ गिरावट आई। नए सिरे से तनाव शुरू होने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 103-106 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी हुई है।

कच्चे कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक वृद्धि के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम अपरिवर्तित रहे हैं।

राष्ट्रीय राजधानी में पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 87.67 रुपये प्रति लीटर है।