श्रीनगर: दो अगस्त (ए) हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के पूर्व नेता बिलाल गनी लोन ने रविवार को उत्तर कश्मीर के हंदवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में कार्यकर्ताओं की एक रैली कर मुख्यधारा की राजनीति में प्रवेश का संकेत दिया और आतंकी हमले में जान गंवाने वाले अपने पिता अब्दुल गनी लोन की राजनीतिक विरासत पर दावा जताया।
इस कदम को लोन परिवार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। इससे उनके छोटे भाई, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और हंदवाड़ा के विधायक सज्जाद गनी लोन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।
पिछले साल जुलाई में ‘ बातचीत के दौरान बिलाल लोन ने कहा था कि हुर्रियत कॉन्फ्रेंस अपनी अप्रासंगिकता के लिए खुद ही जिम्मेदार है। उन्होंने अलगाववादी संगठन को “निष्क्रिय” बताया था और जम्मू-कश्मीर में “गड़बड़ी” और “विभाजन” पैदा करने के लिए पाकिस्तान की आलोचना की थी।
रविवार को कुपवाड़ा जिले के दार्द हरी गांव में बिलाल लोन की रैली अलगाववादी राजनीति से मुख्यधारा की राजनीतिक भागीदारी की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर बदलती परिस्थितियों को देखते हुए लोगों के हितों की रक्षा करना जरूरी है।
बिलाल लोन के राजनीति में आने के बाद हंदवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में दो भाइयों के बीच राजनीतिक मुकाबला होने की संभावना है। दोनों अपने पिता की राजनीतिक व वैचारिक विरासत को आगे बढ़ाने का दावा कर रहे हैं।
उनके पिता एक प्रमुख हुर्रियत नेता थे, जिनकी 21 मई 2002 को यहां मीरवाइज मौलवी फारूक की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी।
अपने दिवंगत पिता की राजनीतिक विरासत पर दावा करते हुए बिलाल लोन ने राजनीतिक विरोधियों, खासकर अपने भाई सज्जाद लोन को चुनौती दी।
उन्होंने कहा कि वह अपने पिता के मूल्यों, सिद्धांतों और विचारों के प्रति प्रतिबद्ध हैं।
बिलाल ने लोगों के अधिकारों और हितों के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
उन्होंने कहा, “यह देखकर बहुत दुख होता है कि मेरे पिता का नाम बदनाम किया जा रहा है। वह वास्तव में जनता के नेता थे, जिनमें सत्ता को चुनौती देने का साहस था। वह जीवनभर अपने मूल्यों और सिद्धांतों पर मजबूती से खड़े रहे। दुर्भाग्य से, उनकी विरासत और विचारों पर स्वार्थी राजनीति हावी हो रही है। मैं ऐसा नहीं होने दूंगा ।