बेंगलुरु : सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर एनएसयूआई का प्रदर्शन

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बेंगलुरु: छह अक्टूबर (ए) मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर एनएसयूआई की कर्नाटक इकाई ने मंगलवार को यहां प्रदर्शन किया और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

फ्रीडम पार्क में हुए प्रदर्शन में एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ और एआईसीसी के राष्ट्रीय सचिव गोपीनाथ पलानीअप्पन समेत कई लोग शामिल हुए।कांग्रेस से संबद्ध भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) ने निर्वाचन आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े मुद्दों को लेकर चिंता जताई।

एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष जाखड़ ने बातचीत में कहा कि अब देश के हर कोने से आवाज उठ रही है कि ज्ञानेश कुमार देश के खिलाफ काम कर रहे हैं और उन्हें इस्तीफा देना चाहिए।

जाखड़ ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को ‘चोर’ बताते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने वोट चुराकर सरकार बनाई है।

एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा, ‘‘उन्हें इसके लिए माफी मांगनी होगी। आप एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं को जेल में डाल दें, हम रुकने वाले नहीं हैं। हम ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा करवाएंगे। हम रुकने वाले नहीं हैं। हमारा संघर्ष जारी रहेगा।’’

जाखड़ ने यह बात उस वक्त कही जब पुलिस उन्हें अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ एक वैन में ले जा रही थी।

एआईसीसी के राष्ट्रीय सचिव गोपीनाथ पलानीअप्पन ने कहा कि कांग्रेस का आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाया नहीं जाता और उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती।

उन्होंने कहा कि यह मुद्दा पूरे युवा और छात्र समुदाय से जुड़ा है और आरोप लगाया कि उनके ‘वोट काटने’ की कोशिश की जा रही है।

पलानीअप्पन ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘आज हमारे नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सभी सांसद और सभी महासचिव दिल्ली की सड़कों पर इस मुद्दे के लिए लड़ रहे हैं… हम तब तक नहीं रुकेंगे, जब तक ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाया नहीं जाता और उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती।’’कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मिलीभगत से की जा रही है और अधिकारियों पर ‘वोट चोरी’ करने का आरोप लगाया।

पलानीअप्पन ने कहा, ‘‘सिर्फ इस आधार पर कि कोई जीवित मतदाता अपना निवास बदल चुका है या उसका नाम दो बार दर्ज है, मतदाता सूची से उसका नाम नहीं हटाया जा सकता। इसके लिए नोटिस जारी करने समेत उचित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।’’

उन्होंने उच्चतम न्यायालय का भी उल्लेख किया, जिसने सोमवार को कहा था कि उसने विभिन्न राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान निर्वाचन आयोग द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे फॉर्म-6 में किसी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है।

फॉर्म-6 के जरिये कोई पात्र व्यक्ति मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन करता है।

पलानीअप्पन ने कहा, ‘‘यह फॉर्म-6 एक बहुत गलत विषय है। वे कह रहे हैं कि यह सभी की सहमति लेने के बाद किया गया, लेकिन सभी मुख्य निर्वाचन आयुक्तों की सहमति नहीं ली गई थी। वे यह भी कह रहे हैं कि उच्चतम न्यायालय ने मंजूरी दी थी, (लेकिन) उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि उसने ऐसी कोई मंजूरी नहीं दी।’’

उन्होंने कहा कि हजारों छात्र एकजुट हो रहे हैं और देशभर में प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। उन्होंने छात्रों से एकजुट होने और जिम्मेदार लोगों को हटाए जाने तक आंदोलन जारी रखने की अपील की।

एनएसयूआई ने कहा कि वह स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव के लिए मजबूती से खड़ा है तथा चुनाव प्रक्रिया में जवाबदेही की मांग करता है।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि चुनाव कराने के लिए जिम्मेदार संवैधानिक संस्था के रूप में निर्वाचन आयोग पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही के सिद्धांतों को कायम रखे तथा प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार की रक्षा करे।

यह प्रदर्शन दिल्ली में विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन द्वारा निर्वाचन आयोग के कार्यालय तक निकाले गए विरोध मार्च के साथ ही हुआ।