इंदिरा को भी बाद में लगा कि आपातकाल लागू करना एक गलती थी: सोनिया गांधी

राष्ट्रीय
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नयी दिल्ली: सात नवंबर (ए) कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने आपातकाल लागू करने के फैसले को एक गलती करार दिया और कहा कि उनका मानना है कि उनकी सास और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी बाद में ऐसा ही महसूस हुआ था।लगता है कि उनके आसपास राजीव जैसे बहुत कम लोग थे, जो अलग राय रखते थे।’’

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि आखिरकार मेरी सास ने अपनी समझ से स्थिति को पहचानना शुरू किया और उसे सुधारने के लिए कदम उठाए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आपातकाल समाप्त होने के बाद ही मुझे उस दौरान की घटनाओं की गंभीरता का पूरी तरह एहसास हुआ। हां, लोकतांत्रिक अधिकारों में कटौती की गई थी और बंदी प्रत्यक्षीकरण के अधिकार पर रोक लगा दी गई थी, लेकिन यह सब संवैधानिक तरीके से किया गया था।’’

सोनिया गांधी ने कहा, ‘‘फिर भी जब मैं उस दौर को याद करती हूं और इंदिरा गांधी के नजरिये से हालात को समझने की कोशिश करती हूं तो मुझे लगता है कि वह तेजी से बिगड़ती परिस्थितियों से निपटने के लिए संघर्ष कर रही थीं। हिंसक प्रदर्शन हो रहे थे, सरकारी कार्यालयों एवं सार्वजनिक परिवहन के वाहनों में आग लगाई जा रही थी, व्यापक स्तर पर संगठित अशांति थी और यहां तक कि नौकरशाही एवं सशस्त्र बलों से आदेशों की अवहेलना करने का आह्वान भी किया जा रहा था।’’उन्होंने कहा कि बीते समय की घटनाओं को आज बेहतर परिप्रेक्ष्य में समझा जा सकता है।

सोनिया गांधी ने कहा कि इंदिरा गांधी ने खुद भी उस समय के हालात को समझा और मार्च 1977 में चुनाव कराने का फैसला किया।

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ‘‘और आप अच्छी तरह जानते हैं कि बाद में उन्होंने खुद आपातकाल के दौरान हुई ज्यादतियों पर सार्वजनिक रूप से खेद जताया था और माफी मांगी थी।’’

तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 25 जून, 1975 की आधी रात से कुछ पहले देश में आपातकाल लागू किया था।

राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने इंदिरा गांधी के अनुरोध पर आपातकाल की घोषणा की थी जिसे बाद में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी।

इंदिरा गांधी ने 18 जनवरी, 1977 को नए चुनाव कराने की घोषणा की और सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा कर दिया।

इंदिरा गांधी और उनके बेटे संजय गांधी 16 मार्च, 1977 को लोकसभा चुनाव हार गए और उसी साल 21 मार्च को आधिकारिक रूप से आपातकाल समाप्त हो गया।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आपातकाल को लेकर कांग्रेस की कड़ी आलोचना करती रही है और इसे ‘‘लोकतंत्र की हत्या’’ बताती रही है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार भारतीय लोकतंत्र के उस ‘‘काले दौर’’ की याद में ‘संविधान हत्या दिवस’ मनाती रही है।