यरूशलम: 27 अक्टूबर (ए) इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मंगलवार को अपने दक्षिणपंथी समर्थकों से ‘‘जागने’’ और उनकी लिकुड पार्टी को वोट देने की अपील की तथा मतदान करने के लिए अरब मतदाताओं के बड़ी संख्या में बाहर निकलने के प्रति आगाह किया। इजराइल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे नेतन्याहू सात अक्टूबर 2023 को हुए हमास के हमले और उसके बाद गाजा में शुरू हुए युद्ध के बाद, मंगलवार को अपने पहले संसदीय चुनाव का सामना कर रहे हैं, जिसमें 120 सदस्यों वाली ‘नेसेट’ (संसद) के लिए कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है।
इस चुनाव में 73 लाख से ज़्यादा इजरायली नागरिक वोट डालने के पात्र हैं।
लिकुड पार्टी के मतदाताओं के लिए जारी एक वीडियो संदेश में, नेतन्याहू ने आगाह किया कि दक्षिणी इजराइल में अरब मतदाता ‘‘तेजी से मतदान केंद्रों की ओर जा रहे हैं।’’ उन्होंने यह भी दावा किया कि ‘‘वे हमसे जीत छीनने की कोशिश कर रहे हैं।’’ उनका इशारा ‘राअम’ पार्टी के उन तीन कार्यकर्ताओं की ओर था, जिन्हें कथित तौर पर मतदाताओं को रिश्वत देने के संदेह में गिरफ्तार किया गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह गंभीर मामला है और आपराधिक है।’’ उन्होंने दावा किया वे हर एक व्यक्ति तक पहुंचेंगे और आपको इस बारे में आगाह किया जा चुका है।
नेतन्याहू ने यह भी कहा कि नेगेव में अरब मतदाताओं की मतदान में भागीदारी, यहूदी मतदाताओं की तुलना में कहीं अधिक है, हालांकि उन्होंने इस बारे में किसी आंकड़े का हवाला नहीं दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘आपको अवश्य जाना चाहिए और वोट दें।’’ उन्होंने अपने समर्थकों से जल्द मतदान केंद्र पहुंचने की भी अपील की।
उन्होंने कहा, ‘‘हर कोई बाहर निकले और लिकुड पार्टी को वोट दे। हमारे यहूदी राष्ट्र का भविष्य दांव पर लगा हुआ है।’’ उन्होंने चेतावनी दी कि अगर विपक्षी जायनवादी और अरब पार्टियां जीत जाती हैं, तो ‘‘हम जिस यहूदी राष्ट्र को जानते हैं, उसका अंत हो जाएगा।’’
दिन भर, नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर कई संदेश पोस्ट किए, जिनमें उन्होंने अरब और वामपंथी मतदाताओं के बड़ी संख्या में वोट डालने का उल्लेख किया और अपने दक्षिणपंथी समर्थकों से मतदान केंद्रों पर पहुंचने की अपील की।
नेतन्याहू ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘बसें मतदान केंद्रों की ओर जा रही हैं, और अरब इलाकों में लंबी कतारें देखी जा रही हैं। वहीं दूसरी ओर, दक्षिणपंथ के गढ़ अभी भी सोए हुए हैं!’’
उन्होंने कहा, ‘‘अगर हम अभी वोट देने नहीं निकले, तो अरब पार्टियों की सरकार बन जाएगी।’’
ये संदेश मार्च 2015 में चुनाव के दिन नेतन्याहू की उस विवादास्पद अपील की याद दिलाते हैं, जिसमें उन्होंने अपने समर्थकों से कहा था कि अरब मतदाता ‘‘बड़ी संख्या में’’ मतदान केंद्रों की ओर जा रहे हैं। उन्होंने लिकुड पार्टी के समर्थकों से अपील की थी कि उन्हें भी बड़ी संख्या में बाहर निकलना चाहिए।
वर्ष 2015 की उनकी इस अपील की काफी आलोचना हुई थी, लेकिन अंततः उस चुनाव में लिकुड सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी थी।
इजराइल की आबादी में लगभग 21 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले अरब नागरिक, चुनाव के बाद के समीकरणों में अहम भूमिका निभा सकते हैं। मतदान में उनकी भागीदारी अलग-अलग राजनीतिक गुटों के बीच के संतुलन को प्रभावित कर सकती है।
चुनाव विश्लेषकों का अनुमान है कि अरब नागरिकों का मतदान प्रतिशत बढ़कर लगभग 63 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, जबकि 2022 में यह आंकड़ा करीब 53 प्रतिशत था।
अरब-नीत ‘जॉइंट लिस्ट’ और मंसूर अब्बास के नेतृत्व वाली ‘राअम’ अलग-अलग चुनाव लड़ रही हैं।
