नयी दिल्ली: 24 सितंबर (ए) कांग्रेस ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर निर्वाचन आयोग के भीतर मतभेद की खबरों के बीच बृहस्पतिवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग फिर उठाई और यह आरोप भी लगाया कि ‘जेन जी’ को मतदाता सूची से बाहर रखने का प्रयास किया जा रहा है क्योंकि इस वर्ग में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लेकर भारी असंतोष है।
मुख्य विपक्षी दल ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को उनके ‘‘कुटिल मंसूबों’’ के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने अंग्रेजी दैनिक ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित खबर का हवाला देते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार ने आयोग की विश्वसनीयता को नष्ट कर दिया है।
इस खबर में कहा गया है कि गोवा में 97 मतदाताओं के मामलों में निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) ने दस्तावेजों की जांच करने और सुनवाई के बाद उन्हें अंतिम मतदाता सूची में शामिल करने योग्य पाया था, लेकिन ‘‘ईसीआईनेट’’ सॉफ्टवेयर में उन्हें दोबारा शामिल करने का विकल्प उपलब्ध नहीं था। गोवा के सीईओ कार्यालय ने इस संबंध में सात दिनों में आठ बार अनुरोध किया था।
रमेश ने इस खबर का उल्लेख करते हुए ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा ‘‘प्रत्येक नए साक्ष्य’’ से इस बात की पुष्टि होती है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पिछले करीब दो वर्षों से चुनाव प्रक्रिया को लेकर जो सवाल उठाते रहे हैं, वे गंभीर हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘एक गैरकानूनी और केंद्रीकरण वाले कदम के तहत ईआरओ की ईसीआईनेट सॉफ्टवेयर तक पहुंच सीमित कर दी गई। जन प्रतिनिधित्व कानून, 1950 के तहत मतदाता सूची पर वैधानिक अधिकार ईआरओ का है। दो निर्वाचन आयुक्तों ने इस उल्लंघन को लेकर कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा।’’
रमेश ने दावा किया कि अन्य ‘‘गैरकानूनी’’ कदम के तहत फॉर्म-6 के माध्यम से नए मतदाताओं को जोड़ने की प्रक्रिया को और मुश्किल बना दिया गया है।
उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि ‘‘जेन जी’’ को मतदाता सूची से बाहर करने का प्रयास किया जा रहा है।
कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘‘पहले कदम के तौर पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए, अगर उनमें थोड़ी भी विनम्रता और नैतिकता बची है। इसके बाद प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को उनके कुटिल मंसूबों के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा।’’
रमेश ने एक अन्य पोस्ट में दावा किया, ‘‘यह स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री यह सुनिश्चित करने पर आमादा हैं कि जेन जी मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में न हों। यह देखते हुए कि जेन जी सड़कों पर उतर आया है और उनका जमकर मजाक उड़ाया जा रहा है, उन्होंने उन्हें मतदाता सूची से दूर रखने के लिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तैनात कर दिया है।’’
उन्होंने कहा कि हर वर्ष मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के लिए होने वाला विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) रोक दिया गया है।
रमेश ने कहा, ‘‘यह नए मतदाताओं, खासकर उन जेन जी युवाओं को मतदाता सूची में शामिल करने का रास्ता है, जो हाल में 18 वर्ष के हुए हैं। दो अन्य निर्वाचन आयुक्तों द्वारा एसएसआर फिर से शुरू करने पर जोर दिए जाने के बावजूद पिछले दो वर्षों से कोई पुनरीक्षण नहीं हुआ है, क्योंकि नरेन्द्र मोदी के प्रति युवाओं का असंतोष स्पष्ट हो गया था।’’
उन्होंने एक खबर का स्क्रीनशॉट भी साझा किया, जिसमें दावा किया गया था कि निर्वाचन आयोग में मतभेद के बीच 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले ‘जेन जी’ युवाओं को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए होने वाला वार्षिक पुनरीक्षण न केवल अटका हुआ है, बल्कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दो निर्वाचन आयुक्तों के बीच सहमति नहीं बन पाने के कारण मई-जून में इसकी घोषणा की समयसीमा भी निकल चुकी है।
