बीसीआई पांच वर्षीय विधि पाठ्यक्रम के लिए अधिकतम आयु सीमा पर अपना रुख़ स्पष्ट करे : न्यायालय

राष्ट्रीय
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नयी दिल्ली: 25 सितंबर (ए) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को ‘बार काउंसिल ऑफ इंडिया’ (बीसीआई) से कहा कि वह पांच वर्षीय समेकित विधि पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए निर्धारित की गई अधिकतम आयु सीमा को हटाने के संबंध में अपना रुख स्पष्ट करे।

मार्च 2017 में, न्यायालय ने बीसीआई के उस फैसले पर रोक लगा दी थी, जिसमें पांच वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रम के लिए अधिकतम आयु सीमा 22 साल और तीन वर्षीय पाठ्यक्रम के लिए 45 साल तय की गई थी। इस मामले की सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी, क्योंकि बीसीआई ने इस सिलसिले में निर्देश लेने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा है।

सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता ऋषभ दुग्गल के वकील ने सवाल किया कि क्या विधि पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए न्यूनतम योग्यता तय करने की बीसीआई की शक्ति का इस्तेमाल नामांकन चाहने वाले उम्मीदवारों पर अधिकतम आयु सीमा लागू करने के लिए भी किया जा सकता है।

बीसीआई ने आयु सीमा का बचाव करते हुए कहा, ‘‘हमने आयु सीमा इसलिए तय की है कि ज्यादातर पांच साल के विधि पाठ्यक्रम आवासीय होते हैं।’’ साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि अदालत उपयुक्त आयु सीमा तय कर सकती है।

हालांकि, न्यायमूर्ति बागची ने सवाल किया कि क्या किसी पाठ्यक्रम के आवासीय प्रकृति के होने के आधार पर अधिकतम आयु सीमा तय की जा सकती है।

न्यायमूर्ति बागची ने कहा, ‘‘सभी पांच साल के विधि पाठ्यक्रम आवासीय नहीं होते। कलकत्ता विश्वविद्यालय को ही देख लें। अधिकतम आयु सीमा तय करने के लिए यह कोई पैमाना नहीं है।’’

बीसीआई ने कहा कि अदालत इस मुद्दे पर उपयुक्त आदेश पारित कर सकती है।

बीसीआई ने कानूनी शिक्षा नियम, 2008 की धारा 28 के तहत पांच वर्षीय समेकित विधि पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए अधिकतम आयु सीमा 20 वर्ष और अनुसचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े समुदायों के उम्मीदवारों के लिए 22 साल निर्धारित की थी।