केरल के अगले मुख्यमंत्री के चयन को लेकर कांग्रेस में मंत्रणा का दौर जारी

राष्ट्रीय
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नयी दिल्ली/तिरुवनंतपुरम: 11 मई (ए)) केरल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के एक सप्ताह बाद भी इस बात को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। हालांकि, इस बारे में निर्णय लेने के लिए कांग्रेस में मंत्रणा का दौर जारी है।

विधायक दल की बैठक में पार्टी आलाकमान को नेता चुनने के लिए अधिकृत किए जाने और राज्य इकाई के प्रमुख नेताओं की पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे एवं पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ बैठक के बाद अब तक इसकी प्रतीक्षा की जा रही है कि नेतृत्व तीन प्रमुख दावेदारों में किसके नाम पर मुहर लगाता है या फिर कोई चौंकाने वाला नाम भी सामने आ सकता है। इस बीच, कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व ने केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के पूर्व अध्यक्षों के साथ चर्चा करने का फैसला किया है।

सूत्रों का कहना है कि जिन लोगों को पार्टी प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे ने चर्चा के लिए दिल्ली बुलाया है, उनमें अनुभवी नेता और कन्नूर से लोकसभा सदस्य के. सुधाकरन के अलावा एमएम हसन, वीएम सुधीरन, मुल्लापल्ली रामचंद्रन और के. मुरलीधरन शामिल हैं।

पूर्व रक्षा मंत्री और पार्टी के दिग्गज नेता ए के एंटनी के साथ भी चर्चा की जाएगी, जिन्होंने 1996 और 2001 के बीच केपीसीसी अध्यक्ष के रूप में कार्य किया था।

सूत्रों ने कहा कि खरगे और राहुल गांधी द्वारा अगले एक या दो दिन में केरल के नए मुख्यमंत्री पर अंतिम फैसला किए जाने की संभावना है।

कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, पिछली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे वीडी सतीशन और वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं।

वैसे यह कोई पहला मौका नहीं है, जब कांग्रेस ने किसी राज्य में चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री तय करने में कई दिनों का समय लिया है।

इससे पहले, वर्ष 2023 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री का फैसला करने के लिये पार्टी के भीतर लंबी मंत्रणा का दौर चला था। सिद्धरमैया और डी के शिवकुमार दो प्रमुख दावेदार थे और दोनों के स्तर पर पुरजोर तरीके से दावा किया गया था।

आखिरकार सिद्धरमैया को मुख्यमंत्री और शिवकुमार को उप मुख्यमंत्री बनाया गया।

वर्ष 2018 के आखिर में कांग्रेस के मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनावों में जीत हासिल करने के बाद लंबी बातचीत के जरिये मुख्यमंत्रियों का फैसला किया था।

मध्यप्रदेश में कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे, वहीं राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट की दावेदारी प्रमुख थी। छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल, टीएस सिंहदेव तथा ताम्रध्वज साहू प्रमुख दावेदार थे। आखिरकार, कई दिनों की अनिश्चितता के बाद समझौता हुआ था। मध्य प्रदेश में कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाया गया। राजस्थान में गहलोत को मुख्यमंत्री का पद मिला और पायलट को उप मुख्यमंत्री बनाया गया।

छत्तीसगढ़ में बघेल को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके करीब चार वर्षों के बाद सिंहदेव को उप मुख्यमंत्री बनाया गया था।

बीते आठ मई को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने केरल के प्रमुख नेताओं के साथ बैठक की थी। इस बैठक में वेणुगोपाल, चेन्निथला और सतीशन के अलावा केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के प्रमुख सनी जोसेफ और पार्टी की राज्य प्रभारी दीपा दासमुंशी भी बैठक में शामिल हुईं थीं।

तिरुवनंतपुरम में पार्टी नेताओं ने संकेत दिया कि नेतृत्व के मुद्दे पर खरगे की कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद कोई फैसला होने की उम्मीद है।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आलाकमान घोषणा करने से पहले केरल में शक्ति प्रदर्शन के दौर के थमने का इंतजार कर रहा है। पिछले सप्ताह सतीशन और वेणुगोपाल के समर्थकों के बीच प्रदर्शन और ‘पोस्टर वार’ देखने को मिला था।

केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के प्रमुख घटक इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने मुख्यमंत्री के चयन में देरी पर नाराजगी व्यक्त की है और चेतावनी दी है कि लंबे समय तक अनिश्चितता के राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं।

आईयूएमएल के मलप्पुरम जिले के महासचिव पी अब्दुल हमीद ने कहा कि देरी से पहले ही पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता में असंतोष पैदा हो गया है।