2009 के भ्रष्टाचार के एक मामले पूर्व सीआरपीएफ डीआईजी को तीन साल की कठोर कैद

उत्तर प्रदेश लखनऊ
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नयी दिल्ली/लखनऊ: 28 मार्च (ए)) लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने शनिवार को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के पूर्व उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) और दो अन्य को आरक्षी भर्ती से संबंधित रिश्वत के 17 साल पुराने मामले में तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के एक प्रवक्ता ने एक बयान में बताया कि अदालत ने सीआरपीएफ के तत्कालीन उप महानिरीक्षक विनोद कुमार शर्मा तथा बल के दो कर्मियों– सत्यवीर सिंह और तीरथ पाल चतुर्वेदी को दोषी ठहराया एवं उन्हें सजा सुनाई।

सीबीआई के प्रवक्ता ने यहां एक बयान में कहा कि अदालत ने सीआरपीएफ के तत्कालीन उप महानिरीक्षक (डीआईजी) विनोद कुमार शर्मा और सीआरपीएफ के दो कर्मियों सत्यवीर सिंह और तीरथ पाल चतुर्वेदी को दोषी ठहराया और सजा सुनाई।

इसमें कहा गया है कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) में कांस्टेबलों की भर्ती से संबंधित भ्रष्टाचार के मामले में उन्हें तीन साल के कठोर कारावास की सजा के साथ कुल 1.2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

एजेंसी ने सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर शर्मा और अन्य लोगों के खिलाफ 23 फरवरी, 2009 को मामला दर्ज किया था।

बयान में कहा गया है, “जांच से पता चला है कि उसने सीआरपीएफ में कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी) के पद पर भर्ती होने के इच्छुक उम्मीदवारों से अवैध रिश्वत लेने के लिए निजी व्यक्तियों के साथ आपराधिक साजिश रची थी।”

इसमें कहा गया है कि शर्मा ने भर्ती कार्यक्रम और उपलब्ध रिक्तियों के बारे में अग्रिम जानकारी बिचौलियों को प्रदान की थी, जो बाद में संभावित उम्मीदवारों को सुनिश्चित चयन के बदले में भारी रिश्वत देने के लिए प्रेरित कर रहे थे।

एजेंसी ने 2010 में एक साल के भीतर आरोप पत्र दाखिल किया था, जिसके बाद 2012 में एक और आरोप पत्र दाखिल किया गया।