नयी दिल्ली: 15 मई (ए)
) उच्चतम न्यायालय ने 2003 के बहुचर्चित मधुमिता शुक्ला हत्याकांड के एक दोषी की समय पूर्व रिहाई के अनुरोध वाली याचिका को शुक्रवार को विचारार्थ स्वीकार करते हुए कहा कि किसी अपराध की प्रकृति ही माफी से इनकार करने का एकमात्र आधार नहीं हो सकती।
न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने गृह मंत्रालय के नौ जुलाई, 2025 के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें दोषी रोहित चतुर्वेदी की समय पूर्व रिहाई के लिए उत्तराखंड सरकार की सिफारिश को खारिज कर दिया गया था।