इस्लामाबाद: 14 अक्टूबर (ए) पाकिस्तान में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले करीब 15 लाख बच्चों को एक साल के दौरान तकनीक के जरिए यौन शोषण या उत्पीड़न के कम से कम एक रूप का सामना करना पड़ा। एक नए अध्ययन से यह जानकारी प्राप्त हुई।
‘डॉन’ अखबार की खबर के अनुसार, यूनिसेफ, एकपैट इंटरनेशनल और इंटरपोल द्वारा सितंबर में संयुक्त रूप से प्रकाशित अध्ययन इस धारणा को चुनौती देता है कि ऑनलाइन शोषण मुख्य रूप से अजनबियों द्वारा किया जाता है। बच्चों ने जिन घटनाओं का जिक्र किया, उनमें से 85 प्रतिशत मामलों में आरोपी ऐसा व्यक्ति था, जिसे वे पहले से जानते थे। शोषण के सामने आए मामलों में 44 प्रतिशत सोशल मीडिया से जुड़े थे, जिससे यह डिजिटल माध्यम शोषण की सबसे अधिक रिपोर्ट की जाने वाली जगह बन गया।
अध्ययन में कहा गया कि पाकिस्तान में 12 से 17 वर्ष की उम्र के इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लगभग हर 16 में से एक बच्चे को यानी करीब 15 लाख बच्चों को एक साल के दौरान तकनीक के जरिए यौन शोषण या उत्पीड़न के कम से कम एक रूप का सामना करना पड़ा।
डर, सामाजिक कलंक और घर में संभावित प्रतिकूल परिणामों के कारण अक्सर बच्चे मदद मांगने से बचते हैं।
पीड़ित बच्चों को डर हो सकता है कि उनके परिवार उन्हें दोषी ठहराएंगे, अपमानित करेंगे या उन पर पाबंदियां लगा देंगे। सामाजिक अपेक्षाओं के कारण लड़कों के मामलों को भी नजरअंदाज किए जाने का खतरा है, क्योंकि मर्दानगी को लेकर बनी धारणाओं और यौन शोषण पर बात करने में झिझक के चलते उनके अनुभव सामने नहीं आ पाते।
यूनिसेफ के अनुसार, तकनीक के जरिए यौन शोषण या उत्पीड़न का सामना करने वाले आधे से अधिक बच्चों ने इस बारे में किसी को नहीं बताया। सर्वेक्षण में शामिल किसी भी बच्चे ने हेल्पलाइन, सामाजिक कार्यकर्ताओं या पुलिस जैसे आधिकारिक माध्यमों से अपने अनुभव की शिकायत नहीं की।
ये निष्कर्ष सुरक्षित, गोपनीय और आसानी से उपलब्ध शिकायत व्यवस्था की जरूरत को रेखांकित करते हैं। साथ ही, ऐसी सहायता व्यवस्था भी जरूरी है, जिससे बच्चे दोषी ठहराए जाने या सजा मिलने के डर के बिना मदद मांग सकें।
ऑनलाइन शोषण बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी एक व्यापक चुनौती का हिस्सा है, जिस पर गरीबी, विस्थापन और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच बाधित होने का भी असर पड़ता है।
‘डॉन’ की खबर के अनुसार, इस बीच, बच्चों के खिलाफ हिंसा पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव की विशेष प्रतिनिधि नजात माला म’जिद ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश करते हुए सरकारों से कई तरह के और एक-दूसरे से जुड़े संकटों का सामना कर रहे बच्चों की सुरक्षा मजबूत करने का आग्रह किया।
उन्होंने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पत्रकारों से कहा, “लगभग 4.5 करोड़ बच्चे संघर्षों के कारण विस्थापित हैं। इसके अलावा, प्राकृतिक आपदाओं और जलवायु संकट के कारण भी उन्हें विस्थापन का सामना करना पड़ रहा है।”तकनीक में तेजी से हो रही प्रगति बच्चों के सीखने और संवाद करने के नए अवसर पैदा करने के साथ-साथ उनके लिए नए जोखिम भी पैदा कर रही है। म’जिद ने चेतावनी दी कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) ने “बच्चों के यौन शोषण के बड़े अवसर” खोल दिए हैं। इसके अलावा, साइबर बुलिंग, डीपफेक और “बच्चों को आपराधिक गतिविधियों में शामिल करने” जैसे खतरे भी बढ़े हैं।
उनकी रिपोर्ट की प्रस्तुति बच्चों के खिलाफ हिंसा पर संयुक्त राष्ट्र के पहले वैश्विक अध्ययन के 20 साल पूरे होने के अवसर पर हुई।
