नयी दिल्ली: 10 सितंबर (ए) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को जुलाई में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रदर्शन में शामिल एक नाबालिग लड़की को कथित रूप से परेशान किए जाने के आरोपों पर गंभीर रुख अपनाते हुए कहा है कि किसी भी व्यक्ति को आपराधिक कार्यवाही आगे बढ़ाने से रोकने के लिए पीड़िता या उसके परिवार को डराने-धमकाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से लड़की की प्राथमिकी पर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा और इस मामले पर दिल्ली सरकार तथा उत्तर प्रदेश सरकार से रिपोर्ट तलब की है।
